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भले ही कमजोर हो गया कोरोना, लेकिन अब लोगों के दिल को दे रहा जोर का झटका, देखें ये रिपोर्ट

35 लाख की आबादी वाले शहर में कार्डियक के मरीजों के लिए शहर में यह एकमात्र सरकारी हॉस्पिटल है।

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Heart attack is the biggest risk in winter

सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा, यूं करें बचाव: देखे पूरा वीडियो

कोरोना (Corona Effect) भले ही अब कमजोर पड़ रहा हो, लेकिन आबादी पर इसके दुष्प्रभावों का साया बढ़ता ही जा रहा है। मथुरादास माथुर अस्पताल (Mathuradas Mathur Hospital) में रोजाना औसतन 140 हार्ट पेशेंट आ रहे है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के बाद हृदय संबंधी बीमारियों (Heart Patient) के मरीज बढ़े हैं। एक जनवरी 2022 से 24 मई, 2023 तक के ओपीडी आंकड़ें देखें तो एमडीएम अस्पताल में कुल 71,761 हार्ट पेशेंट दिखाने आए। 35 लाख की आबादी वाले शहर में कार्डियक के मरीजों के लिए शहर में यह एकमात्र सरकारी हॉस्पिटल है। प्राइवेट हॉस्पिटल के आंकड़े इसमें जोड़े जाएं हालात चिंताजनक बनते जा रहे हैं।

आधे से ज्यादा लौटते निराश

एक मरीज के परिजन का कहना है कि जिनको यहां जगह नहीं मिल पाती है, उनको प्राइवेट हॉस्पिटल या राज्य से बाहर की राह देखनी पड़ती है। जितने मरीजों को दिखाने के लिए पर्ची मिलती है, उससे कई गुना ज्यादा मरीजों को बिना दिखाए ही निराश लौटना पड़ता है।

एमडीएम अस्पताल कार्डियक यूनिट

वर्ष 2022

ओपीडी 50,360

आइपीडी 6549

इको 10,042

एंजियोग्राफी 3049

वर्ष 2023 (एक जनवरी से 24 मई तक)

ओपीडी 21,401

आइपीडी 1645

इको 5954

एंजियोग्राफी 1074

एंजियोप्लास्टी 535


कोरोना के साइट इफेक्ट

डॉ. एस.एन. मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. रोहित माथुर का कहना है कि कोरोना के साइड इफेक्ट सामने आ रहे हैं। कोरोना इंफेक्शन से हार्ट की धमनियां प्रभावित हुई हैं। मानसिक अवसाद बढ़ा है। इससे हार्ट पेशेंट बढ़े हैं। कोरोना काल में घूमना-फिरना कम होने से भी सेहत प्रभावित हुई है।