
माचिया जैविक उद्यान में डॉग फेमिली के 17 वन्यजीवों पर कोरोना का खतरा, बंदरों पर भी रखी जा रही निगरानी
नंदकिशोर सारस्वत/जोधपुर. जैव विविधता से परिपूर्ण जोधपुर के माचिया जैविक उद्यान में अलग-अलग एन्क्लोजर्स के डॉग फेमिली सदस्यों भेडि़ए, जैकाल और लोमड़ी तथा बंदरों पर कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए उनकी विशेष देखभाल की जा रही हैं। डॉग फेमिली के वन्यजीवों और बंदरों के आसपास चिकित्सक व केयर टेकर के अलावा विभाग के कर्मचारी व सफाई कर्मचारी को जाने से सख्त मना कर दिया गया हैं। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह राठौड़ ने बताया कि माचिया जैविक उद्यान में कुल 20 तरह की प्रजातियां हैं। इनमें डॉग (केनिडी) फेमिली के सदस्यों करीब 17 और बंदरों की संख्या 9 है जिन पर कोरोना संक्रमण के असर होने की संभावना को देखते हुए विशेष निगरानी रखी जा रही है। हालांकि माचिया जैविक उद्यान को दर्शकों के लिए राज्य सरकार आगामी आदेश तक पूरी तरह बंद कर दिया गया हैं। माचिया जैविक उद्यान के शाकाहारी, केट फेमिली के वन्यजीवों अथवा पक्षियों पर संक्रमण का कोई खतरा नहीं है।
बंदरों को केला और मांसाहारियोंको उबाल कर दे रहे भोजन
कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए डॉग फेमिली सदस्यों व बंदरों के लिए खास ऐहितियात बरती जा रही है। मांसाहारी वन्यजीवों को नियमित भोजन उबालकर दिया जा रहा है। बंदरों को केला, चावल की खीर अथवा दूध उबालकर दिया जा रहा हैं। खाद्य सामग्री आपूर्ति करने वाले ठेकेदार को भी सावधानी के विशेष निर्देश दिए गए हैं। जिस वाहन में वन्यजीवों के लिए खाद्य सामग्री आती है उनका पूरा सेनिटेशन किया जा रहा हैं। वाहन को माचिया जैविक उद्यान में प्रवेश की जगह बाहर प्रवेश द्वार पर रोक दिया जा रहा हैं। केट फेमिली के सदस्य टाइगर, पैंथर, लॉयन और पक्षियों में संक्रमण होने का खतरा नहीं है। विभाग के निर्देशानुसार वन्यजीव चिकित्सालय में भी संक्रमण से बचने के लिए वनकर्मियों की ओर से मास्क, दस्ताने, सेनिटाइजर व सभी तरह की सुरक्षा सामग्री उपयोग में लाई जा रही हैं।
-डॉ. श्रवणसिंह राठौड़, वन्यजीव चिकित्सक, माचिया जैविक उद्यान, जोधपुर
जोधपुर जिले में अब 100 से भी जैकाल
केनिडी परिवार के जैकाल (सियार ) की संख्या जोधपुर जिले में 100 से भी कम है। इसका प्रमुख कारण जिले में अवैध बजरी खनन, सड़क दुघटनाओं में मौत होना है। मांसाहार के साथ मृत मवेशियों का भक्षण करने वाले सियार हर परिस्थिति में खुद का वजूद बचाने में सक्षम माने जाते हैं। इनकी औसत आयु 12 से 13 वर्ष तक की होती हैं।
भेडिय़ों के लिए अपना रहे प्रोटोकॉल
रुडयार्ड किपलिंग की कहानी 'जंगलबुक' में बालक मोगली को पालने वाले वन्यजीव भेडि़ए की संख्या माचिया जैविक में हालांकि तीन ही है जिन पर कोरोना के संभावित असर को देखते हुए शीर्ष अधिकारियों की ओर से निर्देशित प्रोटोकॉल को अपनाया जा रहा है। मरु लोमडिय़ों पर संक्रमण के खतरे को देखते हुए विशेष निगरानी रखी जा रही है।
Published on:
24 Mar 2020 05:02 pm
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