
राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भूमि अवाप्ति विवाद में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त
जोधपुर.
राजस्थान हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 65 (जोधपुर-नागौर) के मध्य फोरलेन सडक़ निर्माण के लिए मूल योजना से ज्यादा भूमि अवाप्त करने के मामले में कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया है।
कोर्ट कमिश्नर को अवाप्त की गई विवादित भूमि का निरीक्षण और सडक़ के केंद्र बिंदु से मूल योजना के अनुसार वांछित भूमि का डिमार्केशन कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
कोर्ट ने नेशनल हाईवे ऑथोरिटी और सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान मौके पर मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 13 मार्च को होगी। न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने शांतिस्वरूप वर्मा की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिए।
याचिका में कहा गया था कि जोधपुर-नागौर के मध्य फोरलेन सड़क निर्माण के लिए मूल योजना के अनुसार सड़क के केंद्र बिंदु से एक तरफ 60 फीट और दूसरी तरफ 90 फीट भूमि अवाप्त की जानी थी।
लेकिन नेशनल हाईवे ऑथोरिटी के अधिकारियों ने कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए केंद्र बिंदु से दोनों तरफ 75-75 फीट भूमि अवाप्त करने का नया प्रस्ताव तैयार कर लिया। इससे याची की 15 फीट अतिरिक्त भूमि अवाप्त हो गई।
सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अधीक्षण अभियंता और नेशनल हाईवे के निदेशक ने पिछले साल ऐसा प्रस्ताव रखा था, लेकिन राज्य सरकार ने 23 फरवरी, 2018 को इसे नामंजूर कर दिया था।
इसके बाद मूल योजना के अनुसार केंद्र बिंदु से एक तरफ 60 फीट और दूसरी तरफ 90 फीट भूमि ही अवाप्त की गई है और इसका मुआवजा दिया जा चुका है।
जबकि याची के अधिवक्ता ने इसका प्रतिवाद किया और कहा कि याची की 75 फीट दायरे में आ रही संपत्ति को अवाप्त किया गया है, जबकि मूल योजना के अनुसार केवल 60 फीट भूमि ही अवाप्त की जानी थी।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए कोर्ट ने अधिवक्ता जे, गहलोत को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किया।
कमिश्नर को अवाप्ति प्रक्रिया के अनुरूप सड़क के केंद्र बिंदु से कितनी भूमि अवाप्त की गई हैए इसकी वस्तुस्थिति रिपोर्ट देने को कहा गया है।
Published on:
05 Mar 2019 01:08 am
