
CUMIN IN WESTERN RAJASTHAN--मौसम ले रहा करवट, और जीरा बन रहा 'जीव का बैरी'
जोधपुर।
मारवाड़ की प्रमुख मसाला फसल जीरा उत्पादन में मौसम की मुख्य भूमिका रहती है। मौसम अनुकूल नहीं होने पर जीरा 'जीव का बैरी' का बैरी बन जाता है, जीरे की फसल को लेकर मारवाड़ में लोकगीत भी प्रचलित है। यानि प्रतिकूल मौसम से जीरे की फसल को बड़ा नुकसान होता है।
लगातार परिवर्तित हो रहे मौसम से पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख मसाला फसल जीरे के प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। तापमान में वृद्धि के साथ अब बादल, बेमौसम बारिश से कुछ क्षेत्रों में जीरे की फसल को नुकसान हुआ है। जीरा मौसम के प्रति सबसे संवेदनशील फसल है। जनवरी माह तक अनुकूल मौसम व जीरे के बाजार में अच्छे भावों से किसानों को जीरे की फसल से कुछ उम्मीद बनी थी लेकिन फरवरी के दूसरे सप्ताह से ही अचानक तापमान बढ़ने से जीरे पर आशंका के बादल मंडराने लगे थे। बढ़े हुए तापमान से अगेती फसल में छाछिया, चरमा व मैला का प्रकोप बढ़ने लगा है। जिससे जीरे के झुलसने व दाने अधपके रहने से उत्पादन व गुणवत्ता खराब होने लगी है। चरमा रोग से भारी नुकसान झेलने के बाद शेष बची जीरे की फसल से आस बांधे बैठे किसानों के अरमानों पर आंधी, बादल व बारिश ने पानी फेर दिया है ।
---
सामान्य से 30 प्रतिशत कम बुवाई
जीरे की बिजाई प्रतिवर्ष अक्टूबर अंत से नवंबर तक होती है। पिछले दो सालों से जीरे का बाजार मंदा रहने व सरसो के भावों में तेजी के चलते इस बार किसानों का जीरे की बिंजाई की ओर से रुझान कम रहा। नतीजतन, सामान्य से 30 प्रतिशत कम बुवाई हुई।
----------
देश में सबसे ज्यादा जीरा उत्पादन राजस्थान में
देश में जीरे के कुल उत्पादन में से करीब 55 प्रतिशत जीरा राजस्थान में होता है। बाड़मेर, जैसलमेर, सांचोर, जोधपुर, नागौर, जालौर, पाली जिले जीरे के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र हैं। जबकि शेष 45 प्रतिशत जीरा गुजरात में होता है। क्वालिटी और गुणवत्ता के हिसाब से राजस्थान का जीरा अच्छा माना जाता है।
---
जिले में जीरे की बुवाई हैक्टेयर में
वर्ष------ बिजाई
2021-22- 150000
2020-21- 190000
2019-20- 191073
2018-19-168050
2017-18-157612
---
एडवाइजरी जारी करे विभाग
भारतीय किसान संघ के प्रदेश मंत्री तुलछाराम सिंवर व प्रांत अध्यक्ष नरेश व्यास ने बताया कि तापमान बढऩे से जीरे में रोग व कीट का प्रकोप बढऩे लगा है। जोधपुर, बाड़मेर व जैसलमेर के कुछ क्षेत्रों में चरमा व छाछिया रोग से जीरे में नुकसान हुआ है। किसानों को क्लेम व मुआवजे की कार्यवाही करके बचे हुए जीरे को रोग कीट से बचाने के लिए विभाग को एडवाइजरी जारी करनी चाहिए।
Published on:
10 Mar 2022 10:08 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
