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जोधपुर

औद्योगिक इकाइयों से दुगुने दाम वसूलने का निर्णय अवैध

-हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने निस्तारित की एक दर्जन अपीलें -औद्योगिक इकाइयों को बकाया राशि पर ब्याज अदा करने के निर्देश

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जोधपुर। बालोतरा में रीको के औद्योगिक क्षेत्र में 39 औद्योगिक इकाइयों को भूखण्ड आवंटन के मामले में करीब डेढ़ दशक से चल रहा कानूनी विवाद राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार को निपटा दिया। हाईकोर्ट ने इस मामले में संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति एवं राज्य सरकार के उस निर्णय को अवैध करार दे दिया जिसमें 39 औद्योगिक इकाइयों से भूखण्ड के दुगुने दाम वसूलने को कहा गया था।

वरिष्ठ न्यायाधीश संगीत लोढ़ा एवं न्यायाधीश रामेश्वर व्यास की खण्डपीठ ने अपने 24 पेज के निर्णय में रीको की ओर दायर 12 अपीलों को निस्तारित करते हुए यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने हालांकि भूखण्डधारकों को बकाया विकास शुल्क पर ब्याज अदा करने के भी आदेश दिए हैं।

रीको की ओर से अधिवक्ता संजीत पुरोहित ने पैरवी करते हुए एकल पीठ के 6 सितम्बर 2019 को निर्णय को चुनौती दी। अधिवक्ता पुरोहित का कहना था कि 39 औद्योगिक इकाइयों को नाॅन-कंफर्मिंग एरिया से कंफर्मिंग एरिया में स्थानांतरित करने का निर्णय उच्च न्यायालय ने मार्च 2004 में पारित किया था। इसमें भूखण्ड का आकार को लेकर कोई आदेश पारित नहीं किया गया था। लेकिन कमोबेश हर इकाई को 2 हजार वर्ग मीटर का भूखण्ड आवंटित किया जा रहा है। लिहाजा औद्योगिक इकाइयों को आवंटित की जा रही अतिरिक्त भूमि के लिए अधिक दाम वसूलना विधि विपरीत नहीं है। उन्होंने इस सम्बन्ध में संभागीय आयुक्त एवं राज्य सरकार के निर्णय को उचित ठहराया। इसके विपरीत औद्योगिक इकाइयों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता देवकीनन्दन व्यास ने एकल पीठ के निर्णय को पूरी तरह न्यायसंगत करार देते हुए कहा कि रीको ने नवीन भूखण्ड आवंटन के लिए भी आरक्षित दर 1500 रुपये प्रति वर्गमीटर ही तय की है। ऐसे में अदालती आदेश से शिफ्ट की जा रही औद्योगिक इकाइयों से दुगुने दाम यानी 3 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर वसूलने का निर्णय सर्वथा अनुचित है। उन्होंने कहा कि संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली जिस समिति ने इसकी अनुशंसा की है, उस समिति के समक्ष इन इकाइयों का विषय कभी रखा ही नहीं गया। लिहाजा उन्होंने संभागीय आयुक्त की सिफारिश और राज्य सरकार के निर्णय को भी अनुचित बताया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद खण्डपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति केवल ऐसी 95 औद्योगिक इकाइयों के सम्बन्ध में निर्णय करने के लिए ही गठित हुई थी, जिनको किन्हीं कारणों से औद्योगिक भूखण्ड आवंटित नहीं किए गए। लिहाजा इस समिति को मौजूदा 39 इकाइयों के सम्बन्ध में कोई निर्णय करने या सिफारिश करने का अधिकार नहीं था। खण्डपीठ ने इस आधार पर संभागीय आयुक्त वाली समिति की सिफारिश और इस पर राज्य सरकार के निर्णय को अवैध करार दिया। खण्डपीठ ने यह भी तय किया कि रीको एवं राज्य सरकार औद्योगिक इकाइयों को 2 हजार वर्ग मीटर जमीन आवंटन करने के लिए बाध्य थी, लिहाजा आनुपातिक आवंटन का निर्णय नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस सम्बन्ध में एकल पीठ के निर्णय को उचित करार दिया। खण्डपीठ ने हालांकि एकल पीठ के उस निर्णय को बदल दिया, जिसमें एकल पीठ ने औद्योगिक इकाइयों को पहले डिमाण्ड नोटिस की राशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज अदा करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट की खण्डपीठ ने इस सम्बन्ध में औद्योगिक इकाइयों को विकास शुल्क की बकाया 75 प्रतिशत राशि पर भी जमा करवाने की तिथि तक 12 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज अदा करने को कहा है।

दरअसल, हाईकोर्ट ने 16 साल पहले नाॅन-कंफर्मिंग एरिया में संचालित इकाइयों समुचित रूप से स्थानांतरित करने के आदेश दिए थे। इसके बाद रीको ने नाॅन-कंफर्मिंग एरिया में चल रही औद्योगिक इकाइयों को बंद करवा दिया, लेकिन नए स्थान पर औद्योगिक भूखण्ड आवंटित करने के दौरान रीको ने औद्योगिक इकाइयों से अधिक राशि की मांग कर दी। नतीजतन भूखण्ड आवंटन खटाई में पड़ गया। आखिर 16 साल बाद अब इन औद्योगिक इकाइयों को भूखण्ड आवंटन का रास्ता साफ हो गया है।