जोधपुर. भारतीय सेना को सोमवार को धनुष तोप मिल गई। जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएस) में आयोजित कार्यक्रम में सेना को 6 धनुष तोप सौंपी गई।
धनुष भारत की पहली लंबी दूरी की स्वदेशी तोप है। पिछले साल जून में राजस्थान के पोकरण में इसका आखिरी परीक्षण किया गया था। राजस्थान में बाड़मेर, जैसलमेर और श्रीगंगानगर बॉर्डर के साथ जम्मू कश्मीर व ऊंचे इलाकों में धनुष तोप की तैनाती की जाएगी। वर्तमान में पाक से निपटने के लिए स्वीडिश बोफोर्स तोपें बॉर्डर पर तैनात है जो 1987 में सेना में शामिल हुई थी।
धनुष की ताकत
धनुष 155 एमएम गुणा 45 कैलिबर की तोप है। इसकी स्ट्राइक रेंज 38 किलोमीटर है। इसके 81 फीसदी पुर्जे भारत में ही बने हैं। सिक्किम व लेह के ठंडे, ओडिशा के गर्म व नमी और राजस्थान के गर्म मौसम में इसका परीक्षण किया जा चुका है। सभी जगह यह तोप सफल रही है। जीपीएस, कैमरा, लेजर सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक गन लेयिंग और साइटिंग सिस्टम के चलते यह बोफोर्स तोप से 11 किलोमीटर अधिक दूर तक निशाना लगा सकती है। धनुष तोप पर अमरीका से आयातित एम-777 होवित्जर गन और कोरिया से आयातित के-9 व्रज गन लगाई जाएगी।
धनुष तोप
– 38 किमी दूरी तक मारक क्षमता
– 30 सैकेण्ड में तीन राउण्ड फायर
– 3 से 70 डिग्री तक घुमाव
– 13 टन है तोप का वजन
– 16 करोड़ तोप की कीमत
– 81 फीसदी कलपुर्जे स्वदेशी