
BIO AGENTS से नियंत्रित होगी बीमारियां, आसान होगा जीरा, मेथी, सौंफ का निर्यात
जोधपुर।
मारवाड़ की प्रमुख फसलों व संवेदनशील मसाला फसलों जीरा, मेथी, सौंफ आदि में बीमारियां लगने से इनके निर्यात में आने वाली बाधाएं दूर होगी। विभिन्न बीमारियों के कारण इनकी गुणवत्ता प्रभावित होने से इनके निर्यात में काफी कठिनाई आती है। बीजीय मसालों की फसलों में लगने वाली बीमारियों के समाधान के लिए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में बायो कंट्रोल लेब (जैव नियंत्रण प्रयोगशाला) बनेगी, जहां बायो एजेन्ट्स (जैव नियंत्रक या जीवाणु) तैयार किए जाएंगे। जो फसलों में होने वाली बीमारियों को नियंत्रित करेंगे।सुपारी एवं मसाला निदेशालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से विभिन्न फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए करीब 90 लाख की लागत से बायो कंट्रोल लेब स्थापित करने की जाएगी। उल्लेखनीय है कि सुपारी व मसाला निदेशालय ने पूरे देश में कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को नोडल एजेन्सी बनाया है।
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ये बायो एजेन्ट्स तैयार किए जाएंगे
परियोजना अधिकारी डॉ एमएल मेहरिया ने बताया कि करीब 90 लाख की लागत से तैयार होने वाली बायो कंट्रोल लेब में दीमक, उखेड़ा, फफूंदी आदि अन्य बीमारियोें के नियंत्रण के लिए ट्राइकोडरमा, मेटारिजीयम, बवेरिया, बेसियन, स्यूकेमोनास आदि बायो एजेन्ट्स तैयार किए जाएंगे। जो फसलों मे होने वाले रोगों को बचाने में सहायता करेंगे। इससे जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ काफी हद तक किसानों की समस्या का हल हो सकेगा।
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लेब स्थापना के उद्देश्य
- फसलों में लगने वाली बीमारियों का रसायनमुक्त प्रबंधन करना।
- फसलों की उत्पादकता में सुधार के लिए उपयोगी बायो एजेन्ट्स की पहचान कर उनका वैज्ञानिक मूल्यांकन करना ।
- इससे कृषि लागत को कम करने में सहायता मिलेगी।
- किसानों को कृषि की आधुनिक जानकारी और शोधार्थियों को गुणवत्तायुक्त शोधकार्य का लाभ मिल सकेगा।
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पश्चिमी राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ावा देने व खेती में पेस्टीसाइट्स के उपयोग को रोकने के लिए लेब की स्थापना की जाएगी। इससे किसानों को उनके कृषि उत्पादों के रसायन मुक्त उपचार से निर्यात में आने वाली कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
प्रो बीआर चौधरी, कुलपति
कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर
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Published on:
05 Mar 2024 09:23 pm
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