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132 साल प्राचीन है 86 लक्ष्मी की दुर्लभ तस्वीरें, 1890 से हर साल करते है परम्परा का निर्वहन

जोधपुर शहर के शास्त्रीनगर निवासी मेहता परिवार पिछले 132 सालों पूर्व अपने पूर्वजों की ओर से महालक्ष्मी पूजन में प्रयुक्त चित्रों को एक विरासत के रूप में सहेजे हुए है।

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जोधपुर शहर के शास्त्रीनगर निवासी मेहता परिवार पिछले 132 सालों पूर्व अपने पूर्वजों की ओर से महालक्ष्मी पूजन में प्रयुक्त चित्रों को एक विरासत के रूप में सहेजे हुए है। जोधपुर रियासत के तीन पीढ़ी तक लगातार जोधपुर राज्य के दीवान रहे दीवान मुहता अखेचंद, दीवान लक्ष्मीचंद और दीवान मुहता मुकनचंद मेहता परिवार के वर्तमान मुखिया पवन मेहता ने बताया कि 132 साल पहले हर साल दीपावली के दिन महालक्ष्मी पूजन के लिए चांदी और स्वर्णांकित विशेष पेंटिंग कलाकारों के हाथों से खास तौर पर तैयार करवाई जाती थी।

ऐसे ही महालक्ष्मी के दुर्लभ 86 चित्र आज भी उनके पास मौजूद हैं, जो हर साल लक्ष्मी पूजन के दौरान पूजा स्थल परिसर में रखकर पूजन किया जाता है। मेहता ने बताया कि लीथो प्रिन्टिंग के प्रचलन में आने के बाद प्रसिद्ध चित्रकार रवि वर्मा के प्रेस में लिथो प्रिंट में प्रकाशित चित्र महालक्ष्मी पूजन में प्रयुक्त किए जाने लगे। ऐसी अनूठी 41 तस्वीरें भी परिवार ने संभाल कर रखी हैं।

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सभी चित्रों पर पूजन के दौरान प्रयुक्त केसर और चंदन के छींटे आज भी चित्रों पर जस के तस मौजूद हैं। चित्रों के साथ किसी भी तरह की छेडख़ानी नहीं की गई है। होटल व ट्रेवल व्यवसाय से जुड़े मेहता ने बताया कि महालक्ष्मी के दुर्लभ चित्र पुरातत्व दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण कई लोगों ने अच्छी राशि देने का ऑफर भी दिया लेकिन उन्होंने मना कर दिया। नागौरीगेट के बाहर मुहताजी का मंदिर भी उनके परिवार द्वारा ही निर्मित किया गया था। तख्तसिंह की ख्यात में भी इसका वर्णन भी मिलता है।

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