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दौड़नी थी औद्योगिक विकास की गाड़ी, अभी ट्रैक ही नहीं बना

-दस साल से हिचकौले ही खा रहा डीएमआईसी प्रोजेक्ट -पहले चरण के दोनों ही नोड में अभी जमीन अधिग्रहण भी अधूरा

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 दौड़नी थी औद्योगिक विकास की गाड़ी, अभी ट्रैक ही नहीं बना

दौड़नी थी औद्योगिक विकास की गाड़ी, अभी ट्रैक ही नहीं बना

सुरेश व्यास/जोधपुर. जिस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) पर प्रदेश के औद्योगिक विकास की बुलेट ट्रेन चलाई जानी थी, अभी तक उसकी पटरियां ही नहीं बिछ सकी हैं। प्रदेश के औद्योगिक विकास की सबसे बड़ी परियोजना दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर (डीएमआईसी) लगभग एक दशक से हिचकौले ही खा रही है।

हालत यह है कि पहले चरण के दोनों नोड खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराना निवेश क्षेत्र और जोधपुर-पाली मारवाड़ इंडस्ट्रीयल एरिया (जेपीएमआईए) का काम शुरू होना तो दूर, अभी तक जमीन अधिग्रहण का काम भी पूरा नहीं हो सका है। कारण कि इतने दिन तो परियोजना के स्पेशल परपज व्हीकल (एसपीवी) को ही मंजूरी नहीं मिल सकी थी। गत जुलाई में मुख्यमंत्री ने इसे मंजूरी दी। इसके बाद एसपीवी के तहत राजस्थान इंडस्ट्रीयल कोरिडोर डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (रिडको) का गठन कर कंपनी में राज्य की 51 व केंद्र की 49 फीसदी हिस्सेदारी तय की गई है। कम्पनी में केंद्र व राज्य के तीन तीन निदेशक होंगे। कंपनी के रजिस्ट्रेशन के बाद मुआवजा राशि तय होगी। फिर कहीं जाकर काम रफ्तार पकड़ सकेगा।

इसलिए हो रही देरी
डीएमआईसी में दूसरे नोड अहम नोड जेपीएमआईए 154 वर्ग किलोमीटर में लगभग सात हजार हेक्टेयर शहरी क्षेत्र में विकसित होना है। इसके लिए पाली जिले के रोहट इलाके के नौ राजस्व गांवों को नगरीय क्षेत्र में शामिल कर पयार्वरण स्वीकृति भी ली जा चुकी है, लेकिन भू-अधिग्रहण अटका हुआ है। इन गांवों की 1388.87 हेक्टेयर सरकारी व गोचर की जमीन अधिग्रहीत की गई है, लेकिन गोचर भूमि के उपयोग पर हाईकोर्ट की रोक से इस जमीन पर सफाई-सर्वे व इसे विकसित करने काम नहीं हो पा रहा। निजी जमीन अधिग्रहण भी अटका हुआ है। हाईकोर्ट की रोक हट भी जाए तो इकाइयों को जमीन आवंटन का काम शुरू होने में अब भी कम से कम दो साल और लगेंगे।

एसआईआर घोषित, प्राधिकरण नहीं बना
दूसरा, राज्य सरकार ने जेपीएमआईए क्षेत्र को विशेष निवेश क्षेत्र (एसआईआर) घोषित कर दिया है। इसके विकास, प्रबंधन व विनियमन के लिए क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण का गठन नहीं हो सका है।

बनेगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब
जेपीएमआईए में जोधपुर-पाली मार्ग पर दो सौ से ढाई सौ हेक्टेयर क्षेत्र में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब बनाया जाएगा। ताकि बाड़मेर में स्थापित हो रही रिफाइनरी की सब्सीडरी यूनिट्स के साथ साथ जोधपुर के हैंडीक्राफ्ट, जोधपुर, पाली व बाड़मेर की टैक्सटाइल्स यूनिट, मेडिकल डिवाइसेस व इंजीनियरिंग इकाइयों को फायदा मिल सके।

नीमराना से तेज हो सकता है काम
जोधपुर-पाली नोड का काम नीमराना से तेज गति से पूरा हो सकता है। कारण कि यह इलाका राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ा हुआ होने के साथ मारवाड़ जंक्शन से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से नजदीक है। भू-अधिग्रहण अभी भले ही गति नहीं पकड़ पाया है, लेकिन नीदरलैंड की एक कम्पनी ने इंडस्ट्रीयल लैंड की डिटेल प्लानिंग लगभग पूरी कर ली है। साथ ही मार्केटिंग एक्सेस का काम भी शुरू किया जा चुका है।

यह होने हैं प्रमुख काम
- जोधपुर-पाली मारवाड़ रीजन में जलापूर्ति व वेस्ट वाटर मैनेजमेंट
- अर्ली बर्ड प्रोजेक्ट के तहत नए नागरिक हवाई अड्डे का विकास
- जोधपुर में इंटीग्रेटेड मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब
-ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण
-जोधपुर व पाली में मास रेपिड ट्रांजिट सिस्टम