जोधपुर।
आरजीएचएस कार्ड से करोड़ों रुपए की कैंसर दवाइयों के घोटाले के मामले में संदेह के दायरे में आए निजी अस्पताल के एक चिकित्सक को आखिरकार दस दिन बाद शुक्रवार को पूछताछ के लिए बासनी थाने बुलाया गया। रिमाण्ड पर चल रहे दवा दुकानदार और डॉक्टर से आमने-सामने व अलग-अलग पूछताछ की गई। डॉक्टर ने दवाई दुकानदार से बीस साल से परिचित होना स्वीकार किया। उधर, दो कार्ड धारकों के पुत्र व पोते से भी पूछताछ की गई। (RGHS Scam)
थानाधिकारी जितेन्द्रसिंह ने बताया कि प्रकरण में झंवर मेडिकल एजेंसीज के संचालक जुगल झंवर रिमाण्ड पर है। रिमाण्ड अवधि समाप्त होने पर उसे शनिवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। बासनी मेें निजी अस्पताल के एक डॉक्टर को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया, जहां दोपहर से देर शाम तक डॉक्टर व दवाई दुकानदार से आमने-सामने सवाल जवाब किए गए। वहीं, कई सवालों के बारे में क्रॉस पूछताछ भी की गई। रात को पूछताछ के बाद एकबारगी डॉक्टर को छोड़ दिया गया। पुलिस ने सम्पूर्ण पूछताछ की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की। फिलहाल डॉक्टर ने खुद की भूमिका से साफ इनकार कर अस्पताल के प्रबंधन अथवा कम्प्यूटर ऑपरेटर की मिलीभगत होने का अंदेशा जताया है।
घोटाले की आंतरिक जांच में कार्ड धारक मोहन कंवर के कैंसर होने व उनके कार्ड से लगातार कीमती दवाइयों के बिल उठाए जाने का पता लगा था। इस संबंध में मोहन कंवर के पोते अजीतसिंह को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। मोहन कंवर को कैंसर नहीं है, जबकि उन्हें कैंसर मरीज बताकर कीमती दवाइयाें के बिल उठाए गए हैं। उधर, कार्ड धारक एक हेड कांस्टेबल के कार्ड से भी लागातार कीमती दवाइयों के बिल उठाए गए थे। उन्हें ब्रेन हेमरेज हैं। उनके पुत्र ने आंतरिक पूछताछ में कबूला था कि दवाइयाें के बिल उठाने के लिए उसे 40 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता था। पुलिस ने हेड कांस्टेबल के पुत्र को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया।
पर्चियों की एफएसएल जांच के लिए हस्त लिखावट ली
आरजीएचएस में घोटाले के संबंध में गत 26 सितम्बर को बासनी थाने में धोखाधड़ी व करोड़ों रुपए की दवाइयों के गबन का मामला दर्ज कराया गया था। पुलिस ने दवाई दुकानदार जुगल झंवर को गिरफ्तार किया था। दुकान, घर व फैक्ट्री की तलाशी लेने पर मरीज की अनेक पर्चियां व सीलें जब्त की गईं थी। निजी अस्पताल से भी पुलिस ने डॉक्टर की लिखी पर्चियां जब्त की थी। एफएसएल जांच में ही स्पष्ट हो पाएगा कि पर्चियों पर लिखावट चिकित्सक की है अथवा किसी अन्य की। इस संबंध में पुलिस ने डॉक्टर से लिखावट के नमूने जब्त किए। जिन्हें पर्चियों से मिलाने के लिए एफएसएल भेजा जाएगा।
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डॉक्टर व रिमाण्ड पर चल रहे दवाई दुकान में पूछताछ के अंश…
सवाल : आरजीएचएस की सम्पूर्ण प्रक्रिया क्या है
जवाब : मरीज अस्पताल में आता है। ओपीडी में पर्ची कटवाता है। ओटीपी कार्ड धारक के मोबाइल में आता है। फिर मरीज को पर्ची दी जाती है। जिसे लेकर वो डॉक्टर के पास आता है। जांच के बाद दवाइयां दी जाती हैं जो वो दुकान पर जाकर लेता है।
सवाल : पर्चियों पर लिखावट किसकी है।
जवाब : घोटाले से संबंधित जो पर्चियां मिली हैं उन पर लिखावट मेरी नहीं है। अस्पताल प्रबंधन अथवा कम्प्यूटर ऑपरेटर ही इस बारे में बता सकते हैं। मेरी कोई भूमिका नहीं है।
सवाल : आरोपी जुगल झंवर को कब से जानते हो
जवाब : करीब बीस साल से परिचित हूं।