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आखिर काम पर वापस लौटे भगवान, मरीजों सहित स्वास्थ्य केंद्रों और मेडिकल कॉलेज को मिला ऑक्सीजन

अरिसदा के प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. रामकिशोर विश्नोई ने बताया कि कई सेवारत चिकित्सक हड़ताल की घोषणा के बाद ही काम पर लौट आए हैं।

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जोधपुर . आखिर भगवान सोमवार से वापस अपने काम पर लौट आए हैं। चिकित्सकों के हड़ताल वापस लेने के निर्णय के बाद चिकित्सा विभाग के स्वास्थ्य केन्द्रों और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन मिल गया। अरिसदा के प्रदेश संयुक्त सचिव डॉ. रामकिशोर विश्नोई ने बताया कि कई सेवारत चिकित्सक हड़ताल की घोषणा के बाद ही काम पर लौट आए हैं। शेष साथी भी सोमवार को काम पर लौट आए हैं। उन्हें हड़ताल में मरीजों को हुई पीड़ा का अफसोस है। जोधपुर रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. हरेन्द्र भाकर ने बताया कि उनके सभी साथी रेजीडेंट डॉक्टर सोमवार सुबह ९ बजे महात्मा गांधी, मथुरादास माथुर और उम्मेद अस्पताल में काम पर लौट आए हैं।

रेजीडेंट हड़ताल के दौरान चौथे दिन हुई १२ और मौत

सेवारत चिकित्सकों और डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज के रेजीडेंट चिकित्सकों की हड़ताल के बाद चिकित्सा व्यवस्था पटरी से उतर गई थी। स्वास्थ्य केन्द्र, सैटेलाइट, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज संबंद्ध अस्पतालों में मरीज बेहाल हैं। इमरजेंसी सुविधाएं भी बुरी तरह से प्रभावित हैं। वार्डों हर रोज मौत हो रही है। रविवार शाम तक मिले आंकड़ों में एमडीएम अस्पताल में लगातार तीसरे दिन सात मरीजों की और मौत हुई। इनमें ५ एमडीएम और २ मौतें जनाना विंग में हुई। महात्मा गांधी अस्पताल में ३ और उम्मेद अस्पताल में २ मौतें हुई।

बिगड़ती चिकित्सा व्यवस्था के मद्देनजर सैन्य अस्पताल के चिकित्सक लगाए गए हैं। डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज संबंद्ध इन अस्पतालों में चार दिनों में कुल ५५ मौतें हो चुकी हैं। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन रोजमर्रा की मौतें मान रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एक भी मौत इलाज के अभाव में नहीं हुई है। इससे उलट पर्याप्त डॉक्टर्स की कमी वार्डों और इमरजेंसी वार्डों में साफ देखी जा सकती हैं।

अब अस्पतालों में मरीजों की देखभाल के लिए सरहद के रखवालों को लगाया गया है। पावटा जिला अस्पताल में सैन्य अस्पताल के कैप्टन डॉ. अभिजीत सिंह ने सेवाएं दीं। रेजीडेंसी हॉस्पिटल और प्रतापनगर सैटेलाइट हॉस्पिटल में भी सेना के डॉक्टर लगाए गए। वहीं रविवार सुबह ९ से ११ बजे तक दो घंटे आउटडोर होने के कारण बहुत कम मरीज सरकारी अस्पताल पहुंचे। पावटा जिला अस्पताल में कैप्टन डॉ. सिंह ने करीब सौ मरीजों को देखकर परामर्श दिया। अस्पतालों में मेजर व माइनर ऑपरेशन नहीं हुए, जबकि हड़ताल के चलते कई दिनों से प्लान ऑपरेशन टले हुए हैं। एेसे में केवल आवश्यक ऑपरेशन किए जा रहे हैं।


सरकारी पर्ची पर लिख दी ब्रांडेड दवाइयां

मंडोर सैटेलाइट अस्पताल में सुबह एक सेवानिवृत्त चिकित्सक के सरकारी पर्ची पर जेनेरिक के बजाय ब्रांडेड दवाइयां लिखने से मरीजों व परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों का कहना था कि उन्हें नि:शुल्क दवाइयों से वंचित रखा जा रहा है। इस मामले में युवक कांग्रेस जिला सचिव लक्ष्मणसिंह सोलंकी ने जिला कलक्टर को जांच करवाने का आग्रह किया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं के संयुक्त निदेशक डॉ. संजीव जैन ने बताया कि मामले का पता करवाएंगे। एेसा होता है तो गलत है।