
Dr. Nandkishore Acharya said that Government cannot deny citizenship to anyone
एम आई जाहिर/ जोधपुर ( jodhpur news. current news ). केंद्र सरकार ( CAA and NRC ) ने मानवाधिकार घोषणा पत्र ( Human Rights Declaration ) पर हस्ताक्षर किए हैं, इसलिए वह किसी को भी नागरिकता ( citizenship ) से वंचित नहीं कर सकती। देश भर में नागरिकता संशोधन विधेयक और एनआरसी के समर्थन और विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के बीच साहित्य अकादमी पुरस्कार के लिए चयनित जाने माने साहित्यकार ( well-known litterateur ) व अहिंसा शांति ग्रंथमाला का संपादन कर रहे डॉ. नंदकिशोर आचार्य ( Nandkishore Acharya ने साहित्य अकादमी पुरस्कार ( Sahitya Akademi Award ) की घोषणा के बाद पत्रिका के साथ पहले इंटरव्यू में बेबाकी से यह बड़ी बात कही। वे ट्रिपल आइआइटी हैदराबाद में अहिंसा व शांति अध्ययन विषय के प्रोफेसर एमिनेंस और अहिंसा विश्वकोश के संपादक व महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा में अहिंसा व वैकल्पिक विकास मानवाधिकार विषय के प्रोफेसर भी रह चुके हैं।
उन्होंने एक प्रश्न के उत्तर में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए, लेकिन बहुमत का शासन भी कई बार हिंसा करता है। वह स्थूल हिंसा चाहे न भी हो। क्यों कि हिंसा केवल स्थूल नहीं होती। उसके कई प्रकार होते हैं। महात्मा गांधी तो राज्य को भी एक संघ केंद्रित व संगठित हिंसा ही मानते थे। इसीलिए वे एेसी व्यवस्था की कल्पना करते थे,जिसमें राज्य सत्ता भी किसी एक स्थान पर केंद्रित न हो, जैसा कि सभी राज्यों में होता है।
डॉ.आचार्य ने कहा कि किसी भी हिंसा का विरोध जब हिंसा से दिया जाता है तो इस संघर्ष में जिसकी जीत होती है, वह दरअसल हिंसा की ही जीत होती है। क्यों कि दोनों पक्षों में से वही जीतता है, जो अधिक हिंसक होता है। उसके जीतने से यह सिद्ध नहीं होता कि वह सही है। क्यों कि एेसे में चित्त नहीं जीतता। इससे नैतिकता नहीं जीतती।
Published on:
24 Dec 2019 03:24 pm
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