
नाश्ते में खाइए बाजरी के कुरकुरे
जोधपुर. केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) ने बाजरे को घर-घर पहुंचाने का रास्ता साफ कर दिया है। काजरी ने विशेष तकनीक से बाजरा के कुरकुरे (पफिंग) बनाए हैं जो बाजार में मिलने वाले चावल व मक्के के कुरकुरे के समान ही आसानी से तो पचते ही है लेकिन पोषकता में कहीं अधिक आगे है। इसमें उच्च मात्रा में प्रोटीन, आयरन, फाइबर व अन्य खनिज लवण है। बाजरा के कुरकुरे ग्लूटिन फ्री है, जिससे डायबिटीक मरीज भी खा सकते हैं। आने वाले समय में घर, दफ्तर, रेस्तरां, फ्लाइट के नाश्ते में इन कुरकुरों का इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिसका सीधा फायदा राजस्थान के किसान को होगा। बाजरा के कुरकुरे बनाना काजरी के लिए आसान नहीं था क्योंकि बाजरे का उत्पाद मुलायम नहीं होता है इसलिए इसमें 25 से 30 प्रतिशत मक्का मिलाया गया। काजरी ने कुरकुरे की मशीन (एक्सट्रयूडर) खुद ही अपनी प्रयोगशाला में तैयार की, जिसकी लागत बहुत कम केवल 50 हजार आई है। इस मशीन से प्रति घण्टा 15 से 20 किलो कुरकुरे बन रहे हैं।
बाजरे की रोटी की तरह देरी से नहीं पचेगा
कुरकुरे काजरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ दिलीप जैन और डॉ सोमा श्रीवास्तव ने तैयार किए हैं। बाजरा में प्रोटीन अधिक होने के साथ कुछ अघुलनशील फाइबर होते हैं जिसके कारण बाजरे की रोटी आसानी से नहीं पचती है। आसानी से पाचन के लिए प्रयोगशाला में बाजरे को 150 डिग्री से अधिक तापमान और उच्च दाब पर फ्राई किया गया। मक्का मिलाने से कुरकुरे का रंग ग्रे की बजाय क्रीम हो गया है जिससे बच्चे भी आकर्षित होकर आसानी से खा सकेंगे।
उपराष्ट्रपति को बहुत पसंद आए, गवर्नर को खुद लिखाया
हाल ही जोधपुर आए उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू को काजरी दौरे के दौरान सर्वाधिक अच्छा उत्पाद कुरकुरे ही लगे। उन्होंने अपने साथ आए राज्यपाल कलराज मिश्र, राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत को प्लेट आगे करके कहा था- ‘आप लोग कुरकुरे नहीं खाओगे तो यह घर-घर कैसे पहुंचेगा।’ इसी दौरान आइआइटी जोधपुर के एक कार्यक्रम में बच्चों के पिज्जा, बर्गर, सैंडविच खाने की आदतों पर नायडू ने पहले ही चिंता प्रकट कर दी थी।
1999 में देश में पहली बार कुरकुरे लॉन्च हुए
वर्ष 1999 में पेप्सिको कम्पनी से पफकोर्न को कुरकुरे ब्राण्ड नाम से बाजार में लॉन्च किया लेकिन इसको सर्वाधिक प्रसिद्धी 2004 के बाद अभिनेत्री जूही चावला के ब्राण्ड एम्बेसेडर बनने से मिली। वर्तमान में हर शहर में पफकोर्न के कई स्थानीय उत्पाद गली-मोहल्ले में बिक रहे हैं जो स्वास्थ्यवद्र्धक नहीं है।
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‘बाजरा का कुरकुरा स्वाद और गुण में बाजार में मिल रहे किसी भी उत्पाद से इक्कीस है। एक तरह से हमनें लोगों को अब नाश्ते का और बच्चों के रुटिन का नया उत्पाद तैयार करके दे दिया है।’
डॉ ओपी यादव, निदेशक, काजरी जोधपुर
Published on:
13 Oct 2021 08:23 pm
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