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नगर निगम से जारी हुए फ र्जी पट्टों की जांच के प्रकरण में बाबुओं के बयान लेने के साथ ही चालान बुक संख्या 524 का जिन्न वापस बाहर आ गया है। निगम आयुक्त अरुणकुमार हसीजा ने चालान बुक की रसीदों की जांच करने के लिए गुरुवार को सूरसागर आयुक्त राजीव गर्ग और अधिक्षण अभियंता सम्पत मेघवाल को बाबुओं के बयान दर्ज करने के लिए नियुक्त किया।
दोनों ने दोपहर से शाम तक सभी बाबुओं के बयान लिए। जांच में पूर्व में इस बात का खुलासा हो चुका है कि जिस बुक से चालान जारी हुआ है वो बुक रिकॉर्ड में गुलाम मोहम्मद के नाम से ही इश्यू हुई थी। दरअसल, बुधवार को पुलिस कमिश्नर अशोकसिंह राठौड़ अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ निगम पहुंचे थे तो उन्होंने फर्जी पट्टा प्रकरण के बारे में महापौर और निगम आयुक्त से गुप्त मंत्रणा की थी।
उसके बाद एक बार फिर जिस चालान बुक से पट्टे जारी हुए हैं। उस चालान बुक से किसी अन्य बाबू ने कोई रसीद काटी या नहीं, इसके बारे में सारी जानकारी ली गई और बाबुओं के बयान तक दर्ज किए गए। बयानों में यह बात सामने आई कि चालान बुक संख्या 524 से एक-दो लीज-डीड की राशि जमा करवाने के साथ ही इक्का-दुक्का भवन निर्माण की राशि जमा करवाने के लिए रसीदें काटी गई थीं। शेष चालान निगम के बाबू गुलाम मोहम्मद ने पट्टों के लिए काटी थी।
निगम की रसीद बुक 524 से बनाए गए 15 फर्जी पट्टे
नगर निगम से जारी हुए फर्जी पट्टों के आरोपी हेमंत ओझा के घर से मिले पट्टों की जांच में यह बात सामने आई थी कि इन पट्टों में से अधिकतर की पत्रावलियां चली ही नहीं, सीधे पट्टे ही तैयार हो गए। इसके अलावा कुछ में पत्रावलियां चली भी हैं तो उनके फर्जी पट्टे हेमंत और अन्य सहयोगियों ने मिल कर जारी कर दिए थे।
आरोपी ने रसीद बुक संख्या 524 में से केवल तीन चालान फाडऩा मंजूर किया था। जबकि आरोपी के घर से मिले पट्टों में से करीब 15 पट्टे रसीद बुक संख्या 524 में से चुराए गए चालान के आधार पर ही बनाए गए थे। इसी रसीद बुक संख्या 524 से केवल धापूदेवी और मोहित दवे के ही फर्जी पट्टे की राशि जमा नहीं हुई, बल्कि इस एक चालान बुक से करीब 15 फर्जी पट्टे जारी हुए थे।
Published on:
05 Aug 2016 01:36 pm
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