
Zahoor khan Mehar
जोधपुर . इतिहास और राजस्थानी साहित्य के हवाले से देश का एक चर्चित नाम है प्रो. जहूर खां मेहर। वे जोधपुर में रहते हैं। जोधपुर. जाने माने इतिहासकार और राजस्थानी के साहित्यकार प्रो. जहूर खां मेहर एक ऐसी जानी मानी शख्सियत हैं, जिन पर हर धर्म और समुदाय के लोग गर्व करते हैं। हर समाज के लोग कहते हैं कि वे हमारे समाज के बारे में इतना कुछ जानते हैं, जो हम नहीं जानते हैं। उन्हें राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति अकादमी बीकानेर की ओर से समग्र साहित्य पर प्रिथम पूनमचंद विश्नोई लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा जा चुका
इस पुरस्कार के तहत उन्हें एक लाख रुपये, अभिनंदन पत्र, स्मृति चिह्न, शॉल व श्रीफल अर्पित किए गए थे। निर्णायकों की राय मिलने के बाद यह पुरस्कार शुरू किया गया था । लंबे समय से अनिर्णय के कारण शुरू न हो पा रहे इस अवार्ड को लेकर पत्रिका के जोधपुर संस्करण ने न जजों की राय आई, न पुरस्कार की बारी आई’ खबर छाप कर राज्य सरकार और अकादमी प्रशासन का ध्यान आकृष्ट किया था, जिसमें बताया गया था अकादमी के तय निर्णायकों की राय न आ पाने के कारण यह पुरस्कार शुरू नहीं हो पा रहा था।
इतिहास पुरुष प्रो. जहूर खां मेहर ; एक नजर
प्रो.मेहर ने राजस्थानी साहित्य व इतिहास के क्षेत्र में विशिष्ट व उल्लेखनीय योगदान दिया है। जोधपुर में 20 जनवरी, 1941 को जन्मे प्रो. जहूर खां मेहर विलक्षण भाषाविद, साहित्यकार और इतिहासकार हैं। वे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर के इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष रहे हैं। उनकी चर्चित पुस्तकों में राजस्थानी संस्कृति रा चितराम, धर मर्जला धर कोसा, जयमल मेड़तिया, अर्जुन आळी आंख, सांस्कृतिक ऐतिहासिक राजस्थान, लक्ष्मीकुमारी चंूडावत ग्रंथावली, आजादी आंदोलन अर राजस्थान, टाळवा निबंध. ऊजळ पख, चेतावनी रा चंूगटिया (राजस्थानी, संपादित), अमीना (राजस्थानी, अनूदित) हैं। इन पुस्तकों सहित उनकी 24 से अधिक पुस्तकें
स्वरचित हैं। प्रो. मेहर को साहित्यिक योगदान के लिए विभिन्न पुरस्कार व सम्मान मिले हैं, जिनमें महेन्द्र जालोदिया पुरस्कार, सर्वोत्तम लेखन पुरस्कार, बाणभट्ट सम्मान, महाराणा कुम्भा पुरस्कार, आगीवाण सम्मान,
विशिष्ट राजस्थानी साहित्यकार सम्मान, मारवाड़ रत्न सम्मान और सांस्कृतिक विरासत रा समवाहक सम्मान शामिल हैं। वे महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय अजमेर के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं।
प्रो मेहर डिजर्व करते हैं
मेरे पिता ने हमेशा राजस्थानी भाषा को बढ़ावा दिया, उन्होंने इसी भावना से राजस्थानी भाषा की अकादमी बनवाई थी। वे अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष थे। प्रो. मेहर सनातन संस्कृति व राजस्थानी भाषा और इतिहास की शलाका
शख्सियत और सभी समाजों में लोकप्रिय हैं, वे इस अवार्ड के लिए डिजर्व करते हैं।
-डॉ.विजयलक्ष्मी विश्नोई
स्व. पूनमंचद विश्नोई की पुत्री व पूर्व अध्यक्ष,राजस्थान समाज कल्याण बोर्ड
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प्रो. जहूर खां मेहर पुरोधा
प्रो. जहूर खां मेहर भाषा, साहित्य और इतिहास के पुरोधा हैं। मैंने अकादमी के संविधान में इस प्रावधान की वकालत की थी, जो मान ली गई थी कि यह अवार्ड उस व्यक्ति को नहीं मिलेगा जो इस अकादमी के सर्वोच्च सम्मान सूर्यमल मीसण पुरस्कार व केंद्रीय साहित्य अकादमी के पुरस्कार से सम्मानित हो।
- डॉ. आईदानसिंह भाटी
पूर्व सदस्य, राजस्थानी भाषा साहित्य व संस्कृति अकादमी
Published on:
02 May 2018 10:47 pm
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