
जयपुर। नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में संत आसाराम व उसके सेवादारों शिल्पी और शरतचंद्र के खिलाफ न्यायाधीश मधुसूदन शर्मा ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दोषी करार दे दिया है। जोधपुर जेल में बनाई गई विशेष कोर्ट में आसाराम की तरफ से वकीलों की फौज आई थी। आसाराम की पैरवी करने के लिए कोर्ट में 14 वकील की टीम मौजूद थी। जबकि 2 सरकारी वकील पीडि़त पक्ष की तरफ से अदालत में मौजूद थे।
देश के सबसे बड़े वकीलों ने भी मानी हार
दुष्कर्म के आरोप में फंसे आसाराम व उसके सेवादारों को देश के बड़े से बड़े वकील भी नहीं बचा सके। 31 अगस्त 2013 से जेल में बंद आसाराम हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक 12 बार जमानत लेने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उन्हें ज़मानत तक नहीं मिल पाई। आसाराम की तरफ से देश के जाने-माने वकील राम जेठमलानी , सुब्रमण्यम स्वामी और सलमान खुर्शीद पैरवी कर चुके हैं, लेकिन किसी कोर्ट में आसाराम को जमानत नहीं सकी।
राजस्थान के इस एडवोकेट ने दिलवा दी थी सलमान खान को जमानत
काले हरिण के शिकार के मामले में जोधपुर उच्च न्यायालय ने फिल्म अभिनेता सलमान को दो दिन पहले पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। उसी दिन अधिवक्ता महेश बोड़ा ने दोपहर को न्यायालय में जमानत याचिका पेश की थी। जिसमें शनिवार को शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट असगर खान ने सलमान खान की ओर से पैरवी करते हुए न्यायालय में खान की ओर से अनेक तथ्य रखे। जिस पर न्यायाधीश (ग्रामीण) रविंद्र जोशी ने सलमान खान को जमानत पर रिहा कर दिया।
एडवोकेट खान ने बताया कि सलमान खान के प्रकरणों को काफी पुराने समय से देख रहे हैं। करीब बीस वर्ष पुराना मामला है। इस अवधि के दौरान एक भी मामले की पेशी पर सलमान खान अनुपस्थित नहीं रहे। समय-समय पर सभी पेशियों पर आते रहे। वहीं आम्र्स एक्ट के मामले में न्यायालय ने खान को पहले ही बरी कर दिया था। उन्होंने बताया कि सुबह साढ़े दस से 12 बजे तक न्यायालय में जमानत के लिए बहस की गई। लंच के बाद दोपहर तीन बजे न्यायाधीश रविंद्र जोशी ने फैसला सुनाते हुए खान को जमानत पर रिहा कर दिया।
Published on:
25 Apr 2018 01:51 pm
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