
रास आने लगी अनार की खेती
लवेरा बावड़ी (जोधपुर). बावड़ी क्षेत्र में किसान परम्परागत खेती के साथ ही खेती में नवाचार कर कम पानी में अच्छा उत्पादन एवं मुनाफे की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं।
क्षेत्र के अणवाणा के प्रगतिशील किसान सुखदेवसिंह व रामप्रकाश डऊकिया ने अपने फार्म हाउस पर बारिश के पानी का संचय करने के लिए एक फार्म पौण्ड का निर्माण करवाते हुए बूंद-बूंद सिचाई की तकनीक अपनाते हुए खेत में करीब तीन हैक्टेयर में अनार का बगीचा लगाया है। सितम्बर 17 में करीब 2300 पौधे अनार के लगाए, जिसमें से 500 नष्ट हो गए। अब 1800 पौधे फल दे रहे हैं।
सहायक कृषि अधिकारी स्वरूपसिंह राठौड़ ने बताया कि गिरते भू जल स्तर एवं परम्परागत खेती के साथ ही ऐसी फसलों की बुवाई करनी चाहिए जो अधिक उत्पादन के साथ मुनाफा दे सके।
बागवानी के तहत अनार के पौधे लगाकर जो नवाचार किया हैं वो और भी किसानों के लिए प्रेरणादायक रहेगा। तीन हैक्टेयर में करीब 1800 अनार के पौधे लगे हैं। बूंद -बूंद सिंचाई तकनीक अपनाकर पौधे की सिंचाई की इसी के साथ ही पौधे के बीच में अन्य फसल उगाकर भी लाभ लिया जा सकता हैं।
बावड़ी क्षेत्र के अणवाणा, पूनियां की बासनी, सोयला, चटालिया, खेड़ापा, हरढाणी के साथ ही अन्य गांवों में किसान अनार के साथ ही पपीता, नीम्बू की खेती कर नवाचार कर रहे हैं।
10 से 15 लाख के हो जाते हैं अनार
प्रगतिशील किसान सुखदेवसिंह व रामप्रकाश डऊकिया ने बताया कि अनार के बगीचे में एक-एक पौधे पर करीब 80 से 100 तक फल लग जाते हैं। अच्छे पकने पर तो एक अनार का वचन करीब तीन सौ साढे तीन सौ ग्राम से अधिक होता हैं। दस से पन्द्रह लाख के अनार की उपज आ जाती हैं। फार्म हाउस पर पानी संग्रहण के लिए बड़ा पानी का पौण्ड बना हुआ हैं और सोलर पैनल भी हैं।
काजरी गए तो मन हो गया
सुखदेवसिंह ने बताया की एक बार जोधपुर काजरी भ्रमण करने गए तो वहां फल व फूलदार पौधे देखे तो मन में विचार आया कि अपन भी नवाचार करे। खेत में अनार लगाने का मानस बनाया, अनार लगा दिए। एक तरह से नई खेती थी, फिर भी कर दी।सरकार को बागवानी पौधे लगाने के लिए प्रयास कर अनुदान पर्याप्त देना चाहिए। इससे किसान गिरते भू जल स्तर में कम पानी में अधिक उत्पादन व अच्छे मुनाफे वाली खेती कर सके।
Published on:
12 Jan 2022 04:39 pm
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