
Folk art- लद्दाख का फ्लॉवर व हिमाचल का ढिंढोरी नृत्य देखने के लिए पधारो म्हारे देस
Folk art- सूर्यनगरी की धरती पर पहली बार देश के 14 राज्यों के 215 आदिवासी लोक नर्तक अपनी लोक कला का जादू बिखेरेंगे । दक्षिण व उत्तर भारत के ये लोक नर्तक 5 से 7 मार्च की शाम टाउन हॉल में प्रस्तुति देंगे ।
अकादमी सचिव अनिल कुमार जैन ने बताया कि आदिवासियों के नृत्य रूपी मोती की चमक निश्चित रूप से यादगार बनने जा रही है। इस समारोह में दक्षिण भारत से तेलंगाना का लम्बाड़ी नृत्य,त्रिपुरा का पांचाली,ओडिसा का गौडा,छत्तीसगढ़ का गौड,सिक्किम का तामांग शैली, महाराष्ट्र का गवली व सोनगी मुखोटा जैसे नृत्य देखने को मिलेंगे ।
समारोह में गुजरात का डांगी मेवासी, राजस्थान का गरासिया, महाराष्ट्र का गवली, उत्तराखंड का खाडिया,हिमाचल का ढिंढोरी, जम्मू-कश्मीर का गोजरी, लद्दाख का फ्लॉवर एवं आसाम का बोडाई निकला नृत्य होंगे । प्रभारी रमेश कंदोई ने बताया कि कार्यक्रम में निःशुल्क प्रवेश है तथा इस संबंध में अकादमी कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है । उत्तर सांस्कृतिक केंद्र पटियाला का अकादमी के साथ सयुंक्त तत्वाधान समारोह में रहेगा।
सूर्यनगरी की धरती पर पहली बार देश के 14 राज्यों के 215 आदिवासी लोक नर्तक अपनी लोक कला का जादू बिखेरेंगे। दक्षिण व उत्तर भारत के ये लोक नर्तक 5 से 7 मार्च की शाम टाउन हॉल में प्रस्तुति देंगे ।
अकादमी सचिव अनिल कुमार जैन ने बताया कि आदिवासियों के नृत्य रूपी मोती की चमक निश्चित रूप से यादगार बनने जा रही है। इस समारोह में दक्षिण भारत से तेलंगाना का लम्बाड़ी नृत्य,त्रिपुरा का पांचाली,ओडिसा का गौडा,छत्तीसगढ़ का गौड,सिक्किम का तामांग शैली, महाराष्ट्र का गवली व सोनगी मुखोटा जैसे नृत्य देखने को मिलेंगे ।
Published on:
04 Mar 2022 01:54 pm
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