
Rammat in phalodi
फलोदी. लोक नाट्य रम्मत एक बार फिर फलोदी में जीवंत हुआ। लटियाल कला मंच द्वारा शनिवार रात शहर के भैय्या नदी में आयोजित राजा भृतहरि की रम्मत में दर्शकों ने कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए नाटक, संगीत, नृत्य और संवाद का भरपूर लुत्फ उठाया। रम्मत का समापन रविवावर सुबह होगा।
चाचक बोहरा ने बांधा हंसी का समां
रम्मत के आयोजन में सबसे पहले दर्शकों को रंगमंच से जोडऩे के लिए चाचक बोहरा व उनकी पत्नी हास्य कलाकार के रूप में एन्ट्री करते है। उनके आते ही रंगमंच पर दर्शकों का ध्यान आकर्षित होने लगा और लोग हंसी-ठिठोली के माध्यम से मंच से जुड़ गए।
फिर शुरू हुआ रम्मत प्रदर्शन-
राजा भृतहरि की रम्मत के रंगमंच से दर्शकों के जुडऩे के बाद राजा का हलकारा आया और फिर राजा भृतहरि ने अपने मंत्रियों के साथ बैठक कर प्रजा का सुख-दुख को समझा। फिर रम्मत के अलग-अलग पात्र कोचवान, पिंगला रानी, नगरवधु, दासी, राजा का छोटा भाई विक्रम, गुरु गौरखनाथ, ब्राह्मण, बेटी ने मंच पर आकर संवाद किए तथा कलाकारों ने बेहतरीन आपसी तालमेल के साथ समय-समय पर संगीत की स्वरलहरियों, संवाद और नाट्यकला से दर्शकों के दिलों में इस भव्य आयोजन की छाप छोड़ दी।
रम्मत के मुख्य घटनाक्रम
मृगणियों ने दिया राजा को श्राप- जब राजा भृतहरि जंगल में शिकार करने गया, तो मृगणियों के बीच बैठा एक हिरण मारा गया। जिस पर मृगणियों ने राजा को श्राप दे दिया कि अब उसकी रानी भी तुम्हारे लिए इसी प्रकार तरसेगी। जिस पर वहां आए गौरखनाथ ने हिरण को जीवित कर दिया और राजा ने गौरखनाथ को गुरु बना लिया।
अमरफल ने खोल दिए राज- धरती पर उतरे एक संत ने गांव के एक ब्राह्मण को अमरफल दिया। तो ब्राह्मण ने जनता के सुख-चैन की कामना के साथ अमरफल को राजा को दे दिया। राजा यह अमरफल अपनी प्रिय रानी पिंगला को दे दिया। इसके बाद यह अमरफल रानी ने कोचवान को, कोचवान ने नगरवधु को और नगरवधु ने वही अमरफल राजा को दे दिया। जब यह अमरफल घूमकर राजा के पास पहुंच गया तो, राजा भी भौंचक्का रह गया और रानी से पूछा अमरफल कहा है? तो रानी कहा कि अमरफल तो खा लिया। जिस पर राजा ने अमरफल दिखाया तो रानी के पास कोई जवाब नहीं था। इस बीच राजा को अमरफल के नगरवधु तक पंहुचने की पूरी जानकारी मिल गई थी। इस घटनाक्रम ने रानी पिंगला व कोचवान के बीच संबंधों का खुलासा कर दिया था। जिससे राजा दुखी होकर संन्यासी बन गया।
रम्मत के आयोजन के दौरान जब एक कलाकार अपनी भूमिका निभाकर मंच से जाता है, तो मारवाड़ी भाषा कुछ पंक्तियों का उच्चारण करते हुए जाता है। जो इस प्रकार है- 'टेरियों भली उठाई टेर, थां पर जगतम्बा री मेरÓ। वहीं आयोजन में भाग लेने वाले दर्शकों का आभार जताने व शिकायत करने के लिए भी गायन होता है। जो इस प्रकार है- 'आया जिकों ने पगे लागण, नहीं आया जिकों री बातÓ।
यह रहे कलाकार
राजा भृतहरि की रम्मत में भूरदास थानवी व जसराज पुरोहित के निर्देशन में जैसलमेर के कमल आचार्य राजा भृतहरि, पोकरण के हेंमशंकर जोशी विक्रम, मनोज छंगाणी, फलोदी के दीनदयाल व्यास पिंगला रानी, बृजमोहन व्यास गुरु गौरखनाथ, जिनेश हुडिय़ा हलकारा, शांतिलाल छंगाणी कोचवान, सुरेश आचार्य ब्राह्मण, प्रकाश व्यास बड़ी रानी व मृगणि दासी, हनुमान ओझा मृगला, शांतिलाल पुरोहित बेटी व नटवर थानवी चाचक बोहरा के किरदार में भूमिका अदा की। (निसं)
Published on:
22 Apr 2018 12:28 am
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