
जोधपुर। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कांग्रेस के सत्ता में आने पर अगले सीएम को लेकर चल रही बहस को विराम देते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि आप चिंता छोड़ दो कि पार्टी मुझे क्या अवसर देगी। इसकी चिंता हमें नहीं करनी चाहिए। वे रविवार को ‘मेरा बूथ मेरा गौरव’ कार्यक्रम में बोल रहे थे। गहलोत ने कहा, उन्होंने केवल एक बार पार्टी से मांग की। सन् 1977 में कांग्रेस से टिकट मांगा। उसके बाद कुछ नहीं मांगा। बिना मांगे मुझे यदि केंद्र में मंत्री बनाया गया हो, दो बार मुख्यमंत्री पद पर रहने का सौभाग्य मिला हो। क्या मुझे यह शोभा देता है कि पार्टी मुझे मुख्यमंत्री बनाएगी तो ही मैं काम करुंगा। गहलोत बोले- आज कांग्रेस तकलीफ में है। उनके लिए पद बहुत गौण है।
झूठे वादे की सरकार
गहलोत ने कहा कि आज देश में झूठे वादे वालों की सरकार है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भारी मतों से चुनाव जीत गई और हमारी सारी स्कीमें धरी रह गई। जबकि मैंने अपने कार्यकाल में पिछली सरकार का एक काम नहीं रोका। मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल की उपलब्धियां भी उन्होंने गिनाईं।
वादों की सुनामी से वे सत्ता में आए
पूर्व केन्द्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने इशारों में गहलोत की खूब प्रशंसा की। भाजपा सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि जनता इनकी वादाखिलाफी से परेशान हैं। पीएम मोदी वादों की सुनामी से सत्ता में आए थे। अब जनता उनसे चार साल का हिसाब पूछना चाहती है।
इधर... क्षेत्रों में बताएंगे विस्तारक, प्रत्याशी नहीं ‘कमल’ खास
जयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों की तर्ज पर भाजपा को मजबूत करने के लिए विस्तारक बनाए गए हैं। प्रत्येक विधानसभा में एक विस्तारक लगाने का निर्णय किया गया है। यह विस्तारक अगले छह माह उनकी प्रभार वाली विधानसभा में रहेंगे और संगठन को मजबूत देने का काम करेंगे। पन्द्रह जून के आसपास इन विस्तारकों को प्रभार वाले क्षेत्र में भेज दिया जाएगा।
भाजपा ने एक साल के प्रशिक्षण के बाद अब सौ विस्तारक तैयार किए हैं। यह विस्तारक पूर्ण रूप से संगठन का काम करेंगे। टिकट की जिम्मेदारी से इन्हें दूर रखा गया है, लेकिन प्रभार वाली विधानसभा में प्रभावशाली नेता कौन हो सकता है, इसकी रिपोर्ट जरूर ये प्रदेश नेतृत्व को देंगे। विस्तारक जनता के बीच जाकर समझाएंगे कि उनको उम्मीदवार को नहीं, कमल के फूल को देखकर वोट देना है। पार्टी का मानना है कि एंटी इंकंबेंसी और निजी विरोध के चलते कई बार कार्यकर्ता पार्टी के उम्मीदवार के साथ नहीं लगते। इस मानसिकता को बदलने के लिए ही विस्तारकों को काम करना होगा।
Updated on:
11 Jun 2018, 10:46 AM IST
Published on:
11 Jun 2018, 10:37 AM IST
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