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जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्ध एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज में शैक्षणिक सत्र 2018-19 में जीरो सेशन घोषित करने के एआईसीटीई के निर्णय से पूर्व छात्रों में रोष है। कॉलेज की एल्युमिनी एसोसिएशन से जुड़े अधिकांश पूर्व छात्रों का कहना है कि जब तक एमबीएम कॉलेज जेएनवीयू से जुड़ा रहेगा, तब तक इसका विकास नहीं हो पाएगा। जेएनवीयू शिक्षक राजनीति के चक्कर में एमबीएम कॉलेज को नुकसान पहुंचा रहा है। एमबीएम कॉलेज को मिल रही ग्रांट को कॉलेज पर खर्च करने की बजाय विवि अपने कार्यों में खर्च कर देता है। पिछले चालीस सालों से न तो नए उपकरण खरीदे गए और ना ही इमारत की मरम्मत की गई है।
देश की पहली आईआईटी से भी पहले का है यह कॉलेज
- एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज देश का सबसे पुराना कॉलेज है। यह देश की प्रथम आईआईटी से भी पहले 1951 में स्थापित हुआ था।
- दो साल तक यह कॉलेज मोहनपुरा पुलिया के पास स्थित न्यू गर्वनमेंट स्कूल में संचालित हुआ।
- फिर समाजसेवी मगनीराम बांगड़ ने नई इमारत बनाकर सरकार को सुपुर्द कर दी तो इसे वर्तमान इमारत में स्थानान्तरित कर दिया गया।
- एआईसीटीई ने 1988 में पहली बार एमबीएम कॉलेज में इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम चलाने के लिए मान्यता दी थी।
- प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव अशोक जैन, जोधपुर के पूर्व पुलिस कमिश्नर भूपेंद्र कुमार दक सहित देश के कई जाने माने उद्योगपति और अधिकारी इसके छात्र रह चुके हैं। अब तक कॉलेज ने 23 हजार इंजीनियर दिए हैं।
इनका कहना है
कॉलेज का पैसा विवि खुद पर खर्च करता है
एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज को 48 करोड़ रुपए सभी कार्यों के लिए चाहिए। राज्य सरकार ने 25 करोड़ रुपए देने की बात कही है। कुछ दिन पहले रुसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) से 5 करोड़ रुपए आए। विवि ने कॉलेज को केवल 1.40 करोड़ दिए। हाल ही रुसा ने इंजीनियरिंग फैकल्टी के लिए फिर 10 करोड़ दिए, लेकिन विवि ने कॉलेज को एक रुपया भी नहीं दिया।
पीसी पुरोहित, अध्यक्ष, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज एल्यूमिनी एसोसिएशन
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जब तक विवि के साथ रहेगा, ऐसा ही रहेगा
एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज जब तक जेएनवीयू के साथ रहेगा, कॉलेज तरक्की नहीं कर सकता। विवि कॉलेज को आट्र्स फैकल्टी जैसा समझता है। कॉलेज की आवाज बैठकों में दबा दी जाती है। जब एआईसीटीई ने पिछले साल चेतावनी दे दी थी तो विवि ने प्रयास क्यों नहीं किया। विवि की लापरवाही की वजह से ऐसा हुआ है।
मनमोहन अग्रवाल, उपाध्यक्ष, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज एल्यूमिनी एसोसिएशन
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एमबीएम को तकनीकी विवि का दर्जा दे दो
कुछ प्राइवेट कॉलेजों के चक्कर में व्यास विवि एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज की छवि धूमिल करने में लगा हुआ है। कभी विवि के शिक्षक अपनी पॉलिटिक्स का शिकार बनाते हैं तो कभी एसोसिएशन भी पॉलिटिक्स करने लगती हैं। कॉलेज को विवि से अलग कर तकनीकी विवि का दर्जा दे देना चाहिए।
सोहन भूतड़ा, पूर्व अध्यक्ष, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज एल्यूमिनी एसोसिएशन
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पूरे राजस्थान के लिए शर्म की बात
एमबीएम कॉलेज में जीरो सेशन होना पूरे राजस्थान के लिए शर्म का विषय है। वैसे हम लोग ऐसा होने नहीं देंगे। यह सब जेएनवीयू की लापरवाही से हुआ है। विवि अगर चाहे तो इसका विकास हो सकता है, लेकिन आपसी फूट का खामियाजा कॉलेज को भुगतना पड़ रहा है। एआईसीटीई को भी इतनी जल्दबाजी दिखाने की आवश्यकता नहीं थी।
रवि अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, एमबीएम इंजीनियरिंग कॉलेज एल्यूमिनी एसोसिएशन
Published on:
17 Apr 2018 11:32 am
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