
DEVI TEMPLE---18वीं शताब्दी में स्थापित की गई चार भुजाधारी मां पद्मावती
जोधपुर।
गुरों का तालाब से सटी पहाड़ी पर स्थित पद्मावती माता का मंदिर जैन धर्मावलम्बियों का प्रमुख आराध्य स्थल है। महाराजा मानसिंह के शासनकाल में 18 वीं शताब्दी के दौरान मिंगसर वदी पंचमी को मंदिर में प्रतिष्ठित पद्मावती माता पद्मकमल पर विराजित है। चार भुजाधारी मां पदमावती का महालक्ष्मी और आद्यशक्ति के रूप में भी पूजन किया जाता है। अखण्ड ज्योत प्रज्ज्वलित मंदिर में मां पद्मावती के प्रथम हाथ में कमल का पुष्प तो दूसरे हाथ में बिजोरा का फल है। तीसरे में अंकुश व चौथे हाथ में माता सुशोभित है। माता का वाहन कर्रकुट सर्प दर्शाया गया है। ऐसी भी मान्यता है कि कभी यतियों की तपोभूमि रहे मंदिर परिसर में माता पद्मावती की मूर्ति स्वयं प्रकट हुई थी। मंदिर के पिछवाड़े विशाल तालाब के नाम पर विकसित हुए रिहायशी क्षेत्र को ही गुरों का तालाब क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में नवरात्रा के दौरान दुष्टविनाशक माता पद्मावती की विधिवत पूजा अर्चना की जाती है। मंदिर से जुड़े भक्तों के अनुसार जैन धर्म में मां पद्मावती भगवान पार्श्वनाथ की अधिष्ठायक देवी मानी जाती हैं।
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मंदिर की स्थापत्य कला बेजोड़
मंदिर मुख्य गर्भगृह की स्थापत्य कला बेजोड़ है। मंदिर का संचालन करने वाले चिंतामणी पार्श्वनाथ जैन मंदिर पेढी तीर्थ के ट्रस्टी ओमप्रकाश चोपड़ा ने बताया कि दोनों ही नवरात्रा के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान व महापूजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर में स्नात्र अभिषेक साल के 365 दिन नियमित रूप से मंदिर में किया जाता है। शारदीय नवरात्र में माता पद्मावती की आरती रोजाना सुबह 7.30 बजे और शाम 6.30 बजे होती है।
Published on:
17 Oct 2023 09:12 pm
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