
CHILLI-- मारवाड़ी मिर्च की साख खराब कर रहा 'फंगस'
जोधपुर।
मारवाड़ की विश्व प्रसिद्ध लाल मिर्च की साख पर फंगस का ग्रहण लग रहा है। मारवाड़ी लाल मिर्च की उत्तम गुणवता के कारण विदेशों में खासी मांग है लेकिन मसालों में लग रहे फंगस 'कीड़े' इसकी क्वालिटी व स्वाद को प्रभावित कर रहे है। मिर्च के भंडारण व पैकिंग के लिए पर्याप्त सुविधाओं के अभाव में मसालों में अन्तरराष्ट्रीय मानकों पर तय मानकों से अधिक रासायनिक कंटेंट मसालों में आ जाते है, इससे निर्यात प्रभावित हो रहा है। प्रदेश में उत्पादित मिर्ची, धनिया, जीरा, मैथी व सौंफ सहित विभिन्न मसालों की गुणवत्ता अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा बेहतर है।
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ये फंगस प्रभावित कर रहे क्वालिटी
- मिर्च में एसपर्जीलस फ्लेवर फंगस से एफ्ला टॉक्सिन जहर निकलता है।
- बाजरा में क्लेबीसेप्स माइक्रोसिफेला फंगस से अर्गट जहर निकलता है।
- जीरा, मैथी, धनिया, सौंफ आदि मसालों में अलग-अलग फंगस फसल को नुकसान पहुंचाते है।
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वर्ष 2021-22 में देश से निर्यात होने वाले प्रमुख मसालों की स्थिति (अनुमानित)
मसाला-- मात्रा टन में---- मूल्य लाख में
मिर्च---- 557468---- 858188.59
जीरा----216996---- 333434.87
सौंफ----40136-----41186.17
मैथी----32403------26285.82
धनिया---48658----48251.38
यह देशभर की स्थिति है। राजस्थान के मसालों को गुणवत्ता व रंग के कारण प्रमुखता दी जाती है।
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विदेशो में भारतीय मसालों की बड़े पैमाने पर मांग है लेकिन जानकारी के अभाव में किसानों के रसायनों का तय मात्रा से ज्यादा उपयोग करने व हानिकारक बैक्टीरिया का मानकों से ज्यादा होने के कारण निर्यात में परेशानी उठानी पड़ती है।
डॉ शैल के कुल्लोली, वरिष्ठ क्षेत्रीय अधिकारी
मसाला बोर्ड, राजस्थान
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कृषि विशेषज्ञों की सलाह से किसान को जैविक उत्पादों के उपयोग के लिए जागरुक कर रहे है। इससे गुणवत्ता में सुधार से निर्यात मांग बढ़ेगी और किसानों को मसालों का सही मूल्य मिल सकेगा।
तुलछाराम सिंवर, प्रदेश मंत्री
भारतीय किसान संघ
Published on:
23 Nov 2022 09:42 pm
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