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Piparcity : बीस साल में सरकार नहीं लगा सकी एक सोनोलॉजिस्ट

इसे विडंबना कहें या अतिश्योक्ति कि जिस अस्पताल में मुख्यमंत्री ने बीस साल पहले जिस सोनोग्राफी सुविधा का उद्घाटन किया उसका लाभ आज तक मरीजों को नहीं मिल सका है। जबकि तीसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पीपाड़सिटी के राजकीय जिला अस्पताल को एक मॉडल हॉस्पिटल के रूप में विकसित करने की सार्वजनिक मंशा जाहिर कर चुके हैं।

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Piparcity  : बीस साल में सरकार नहीं लगा सकी एक सोनोलॉजिस्ट

Piparcity : बीस साल में सरकार नहीं लगा सकी एक सोनोलॉजिस्ट

मुख्यमंत्री ने किया था उदघाटन, विधायक ने दी थी मशीन

पीपाड़सिटी का राजकीय जिला अस्पताल

पीपाड़सिटी (जोधपुर) . इसे विडंबना कहें या अतिश्योक्ति कि जिस अस्पताल में मुख्यमंत्री ने बीस साल पहले जिस सोनोग्राफी सुविधा का उद्घाटन किया उसका लाभ आज तक मरीजों को नहीं मिल सका है। जबकि तीसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पीपाड़सिटी के राजकीय जिला अस्पताल को एक मॉडल हॉस्पिटल के रूप में विकसित करने की सार्वजनिक मंशा जाहिर कर चुके हैं।


पीपाड़सिटी का अस्पताल बीस वर्ष पहले जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र था और गहलोत का राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में पहला कार्यकाल था,तब यहां दिल्ली के विजयराज चौधरी चेरिटेबल ट्रस्ट ने सोनोग्राफी की समस्या को देखते हुए कक्ष के साथ मशीन, एसी सहित अन्य सामान भेंट किया। जिसका मुख्यमंत्री गहलोत ने सन 2002 में लोकार्पण किया।ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी की सबसे अधिक जरूरत रहती है, इसके साथ लीवर, किडनी के मरीजों के लिए भी इस मशीन की रिपोर्ट की सबसे पहले जरूरत रहती हैं।

उपकरण हुए खराब

मुख्यमंत्री के लोकार्पण के बाद भी स्वास्थ्य विभाग कभी एक सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं कर सका।इस दौरान कई चिकित्सक छह-छह माह का प्रशिक्षण भी ले चुके हैं, लेकिन सोनोग्राफी की सुविधा मरीजों को कभी नसीब नहीं हो सकी।वर्षों से गर्भवती महिलाएं हों या अन्य मरीज अस्पताल में कभी सोनोग्राफी नहीं करा सके। हमेशा बाहर निजी क्लीनिक में सोनोग्राफी करवाने को मजबूर रहे। वर्षों तक संचालन और रखरखाव नहीं होने से उनमें जंग लग गया और वो लाखों के उपकरण बेकार हो गए।

विधायक ने दी मशीन

कोरोना काल में मुख्यमंत्री के निर्देश पर नव क्रमोन्नत जिला अस्पताल में विधायक हीराराम मेघवाल ने सोनोग्राफी मशीन सहित अन्य संसाधनों के लिए अपने विवेकाधीन कोष से लाखों की राशि की सोनोग्राफी मशीन दी लेकिन फिर भी सोनोलॉजिस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी। एक बार बिलाड़ा के जिस चिकित्सक को प्रतिनियुक्ति पर लगाया,उनका आदेश रद्द हो गया।अब जिनको लगाया गया हैं, वे भी स्पेशलिस्ट नही बल्कि डिप्लोमा धारक हैं।

एमआरएस फाइलों में दबी

गहलोत ने अपने प्रथम कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों में मेडिकेयर रिलीफ सोसायटी का गठन कराया। एमआरएस कोष में लाखों की राशि जमा है, प्रति माह दो से ढाई लाख का सोसायटी को राजस्व मिलता हैं, लेकिन फिर भी सोसायटी की ओर से सोनोलॉजिस्ट नियुक्त नहीं किया जा रहा है।

इनका कहना है

मुख्यमंत्री के दूसरे घर के जिला अस्पताल में जब सोनोग्राफी की सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो राज्य के अन्य अस्पतालों के हालात कैसे हैं, कुछ कहने की आवश्यकता नहीं।-कमसा मेघवाल, पूर्व राज्यमंत्री.

जिला अस्पताल में मरीजों को आवश्यक सुविधाओं का लाभ जल्दी मिले, इसके लिए शीघ्र ही उचित कदम उठाए जाएंगे।

-डॉ. सुभाष गर्ग,जिला प्रभारी मंत्री