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जोधपुर. जहां एक तरफ सरकार स्वच्छता व सफाई के मद में लाखों-करोड़ों खर्च कर रही है, वहीं प्रदेश में आयुर्वेद विभाग के अधीन संचालित अधिकतर औषधालयों की सफाई प्रतिमाह 125 रुपए के खर्च पर हो रही है। आयुर्वेद विभाग ने चतुर्थ श्रेणी विहिन औषधालयों में सफाई मद के लिए महज 125 रुपए ही खर्च करने का प्रावधान कर रखा है। यदि इससे ज्यादा खर्च हो रहा है तो वह राशि संबंधित औषधालय के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को अपनी जेब से भुगतनी पड़ रही है। अकेले जोधपुर जिले के 124 औषधालयों में से 40 औषधालय ऐसे हैं, जहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं हैं।
ऐसे में औषधालय प्रभारी चिकित्सा अधिकारी को 125 रुपए प्रतिमाह पर किसी व्यक्ति से सफाई करवानी पड़ रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि इतनी कम राशि पर कोई व्यक्ति सफाई नहीं कर सकता। लेकिन चिकित्सा अधिकारी को तो अपना औषधालय साफ और स्वच्छ तो रखना ही है। ऐसे में या तो चिकित्सक अपनी जेब से अधिक राशि देकर किसी से सफाई करवाते हैं या फिर उन चिकित्सक को खुद ही सफाई करनी पड़ती है। पड़ताल में पता चला है कि जोधपुर जिले में ऐसे औषधालयों की सफाई चिकित्सा अधिकारी अपनी जेब से अधिक राशि चुका कर करवा रहे हैं।
आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक श्रद्धानंद शर्मा का कहना है कि लम्बे समय से चतुर्थ श्रेणी विहिन औषधालयों में सफाई पेटे प्रति माह 125 रुपए का ही प्रावधान है। राशि बढ़ाना सरकार या विभाग के निदेशालय स्तर का मामला है। उल्लेखनीय है कि अस्पतालों में पहले ही सफाई व स्वच्छता आदि की समस्या रहती है। इसपर से सरकार की यह उदासीनता किसी रोज मरीजों पर भारी न पड़ जाए। इस ओर विभाग भी आंखे मूंदकर बैठा हुआ है। वहीं आयुर्वेद के प्रति जागरुकता आने के बाद से मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। दबे स्वर में अब तो अधिकारी भी सफाई कर्मचारियों की मांग करने लगे हैं।
Published on:
19 Aug 2018 10:18 am
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