
3 महीने के शिशु के हार्ट का ऑपरेशन, पिचकी हुई महाधमनी में डाला बैलुन
जोधपुर. मथुरादास माथुर अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी डिवीजन की नव स्थापित कैथ लैब में जटिल बीमारी महाधमनी संकुचन से ग्रसित तीन महीने के एक शिशु के हार्ट का ऑपरेशन किय गया। शिशु के हार्ट की महाधमनी में इंटरवेंशन विधि से बैलुन डाला गया जिससे शरीर में रक्त का परिवहन सामान्य हो गया।
जन्म लेने वाले 6 से 8 प्रतिशत शिशुओं में महाधमनी संकुचन होता है। फेफड़ों से आए शुद्ध रक्त को शरीर के अन्य भागों में भेजने का कार्य ह्रदय की महाधमनी करती है। कई बच्चों में यह जन्म से पिचकी हुई होती है। एमडीएम में आए तीन महीने के शिशु में महाधमनी से केवल 15 से 20 प्रतिशत ही रक्त परिवहन हो रहा था। अगर यही िस्थति लम्बे समय तक बनी रहती है तो ह्रदय तेज गति से रक्त को फैंकने की कोशिश करता, जिससे हार्ट अटैक का खतरा था।
अब 50 से 60 प्रतिशत हो गई
एमडीएम अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने बच्चे को आईसीयू में भर्ती करके प्रोसीजर किया गया। इसमें बैलुन डालकर महाधमनी को चौड़ा किया गया। चौड़ा होने के बाद बैलुन निकाल लिया गया। शिशु को 24 घंटे वेंटीलेटर पर रखा गया। तीन दिन बाद जब बच्चे का हृदय पंपिंग 50 से 60 प्रतिशत हो गया उसे छुट्टी दे दी गई जोकि सामान्य िस्थति थी। यह ऑपरेशन आयुष्मान योजना के तहत नि:शुल्क किया गया।
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एमडीएम अस्पताल में इतनी कम आयु के शिशु का पहली बार बैलुन प्रोसीजर किया गया है। आम तौर पर जीवन के पहले वर्ष के दौरान हृदय कैथीटेराइजेशन या सर्जरी की आवश्यकता वाली बीमारियों में इस बीमारी का चौथा स्थान है।
डॉ विकास आर्य, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, एमडीएम अस्पताल
Published on:
12 Jan 2024 09:04 pm
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