
Rajasthan News : राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला न्यायालयों, विधिक सेवा प्राधिकरणों और स्थायी लोक अदालतों में स्टेनोग्राफर ग्रेड-तृतीय (हिंदी एवं अंग्रेजी) के पद पर सीधी भर्ती के संशोधित परिणामों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी है। न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी एवं न्यायाधीश राजेंद्र प्रकाश सोनी की खंडपीठ में याचिकाकर्ता कमल कुमार सहित कई अभ्यर्थियों ने प्रथम परिणामों में त्रुटि पाए जाने पर जारी किए गए संशोधित परिणामों में चयन नहीं होने को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज भंडारी तथा सहयोगी अधिवक्ता सपना वैष्णव ने परिणामों में किए गए संशोधनों को तार्किक तथा उचित बताया। खंडपीठ ने कहा कि लागू किए गए निर्धारित फार्मूले का भर्ती विज्ञापन में उल्लेख नहीं किया गया था, लेकिन यह भर्ती नियमों को बदलने का मामला नहीं है। चयन प्रक्रिया में निर्धारित फार्मूला भर्ती विज्ञापन जारी होने से पहले भी प्रचलन में था और आगे की चयन प्रक्रियाओं में भी लागू रहेगा। कोर्ट ने कहा कि पूरी चयन प्रक्रिया दोषरहित है और फॉर्मूला सभी उम्मीदवारों के लिए समान रूप से लागू किया गया है, भले ही विज्ञापन में इसका उल्लेख किया गया हो या नहीं। निर्धारित फॉर्मूला मूल्यांकन की पद्धति का हिस्सा है, भर्ती की पद्धति का नहीं है। भर्ती की पद्धति का विज्ञापन में विधिवत उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परिणामों को संशोधित किया था।
क्या था मामला
जिला न्यायालयों, विधिक सेवा प्राधिकरणों और स्थायी लोक अदालतों में स्टेनोग्राफर ग्रेड-तृतीय (हिंदी एवं अंग्रेजी) के पद पर सीधी भर्ती के लिए हाईकोर्ट प्रशासन ने 18 जनवरी, 2020 को विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने शॉर्टहैंड टेस्ट और कंप्यूटर टेस्ट में भाग लिया, जिसके बाद 30 जून, 2021 को परिणाम जारी किया गया। परिणाम में याचिकाकर्ताओं को साक्षात्कार के लिए अनंतिम रूप से योग्य माना गया। बाद में 31 जुलाई, 2021 को अंतिम परिणाम घोषित हुआ, लेकिन चयनित उम्मीदवारों की संख्या कम थी, इसलिए पहले तय की गई त्रुटि का मार्जिन यानी 5 प्रतिशत को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। बाद में हाईकोर्ट प्रशासन ने यह कहते हुए परिणाम रद्द कर दिया कि परिणाम तैयार करते समय सॉफ्टवेयर एजेंसी ने उम्मीदवारों की गलतियों को ध्यान में नहीं रखा था। नया परिणाम जारी करने पर पिछले परिणाम में चयनित 46 अभ्यर्थी दोबारा चुने गए, जबकि पिछले परिणाम में चयनित घोषित किए गए लगभग 350 अभ्यर्थी संशोधित परिणाम में चयनित नहीं हो सके। याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए याचिकाएं दायर की कि परिणामों में विसंगतियां थी। नतीजों की घोषणा से पहले न तो कोई निश्चित विधि थी और न ही फॉर्मूला का उपयोग किया गया था। कहीं भी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि गणना कैसे की गई और कट ऑफ सूची कैसे तैयार की गई।
Published on:
20 Mar 2024 11:32 am

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