1 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मास्टर प्लान मामला : कोर्ट ने सरकार को कहा वह इस राज्य को क्या बनाना चाहती है!

सरकार न्यायालय के निर्णयों की पालना नहीं करने के नए-नए तरीके ईजाद कर रही है  

2 min read
Google source verification

जोधपुर

image

Amit Dave

Nov 25, 2017

dr. gulab kothari plea on master plan

high court gets strict on master plan matter, Master Plan, rajasthan High Court, hearing on master plan, jodhpur news

जोधपुर . सरकार न्यायालय को यह बताए कि वह इस राज्य को क्या बनाना चाहती है। सरकार न्यायालय के निर्णयों की पालना न करने के नए-नए तरीके ईजाद कर रही है और विकास के लिए योजनाबद्ध काम नहीं कर रही है। यह टिप्पणी राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश संगीत लोढ़ा व न्यायाधीश अरुण भंसाली की खण्डपीठ ने की। प्रदेश के बड़े शहरों के मास्टर प्लान को लेकर पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी की जनहित याचिका पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान खण्डपीठ ने नाराजगी जाहिर की।

हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान न्यायमित्र एमएस सिंघवी ने जयपुर की पृथ्वीराज नगर योजना को लेकर पक्ष रखा। सिंघवी ने बताया कि पृथ्वीराज नगर से संबंधित नियमितीकरण में भारी धांधलियां पाई गई। अंधाधुंध एवं 'जहां है जैसा हैÓ आधार पर नियमितीकरण न केवल व्यवस्थित योजनाबद्ध विकास के विरुद्ध है, बल्कि हाईकोर्ट के १२ जनवरी, ८ अगस्त व १४ अक्टूबर के निर्देशों की अवहेलना है। जयपुर विकास प्राधिकरण का पक्ष रखते हुए कहा गया कि जेडीए राज्य सरकार के आदेशानुसार ही कार्य कर रहा है। इसके अनुसार सरकारी समितियों के कब्जों का नियमितीकरण सही है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद सभी सर्कुलर अगली सुनवाई पर पेश करने के आदेश दिए।

खुर्दबुर्द की जा रही ११ हजार बीघा जमीन

न्यायमित्र सिंघवी ने कहा कि जेडीए की ओर से भूमाफिया की मिलीभगत से संपूर्ण कार्रवाई को अंजाम देकर पृथ्वीराज नगर की ११ हजार बीघा की करोड़ों रुपए की भूमि को खुर्दबुर्द किया जा रहा है। सरकार ने पृथ्वीराज नगर योजना में 30 सितम्बर 2014 को सर्कुलर जारी कर दरों का निर्धारण किया था। इनमें 100 वर्गगज तक के आवासीय भूखंड में 250 रुपए और व्यावसायिक में 750 रुपए थे। उससे बड़े भूखंडों की दरों का भी निर्धारण किया गया था, लेकिन बाजार मूल्य की बात करें तो सड़क पर आवासीय भूखंड की दर 12250 व अन्दर 10400 रुपए है। व्यावसायिक में सड़क पर 45230 रुपए व अन्दर 29870 रुपए हैं। ऐसे में करोड़ो रुपए की राजस्व हानि हो रही है। वहीं बिना मास्टर प्लान व जोनल प्लान के पृथ्वीराज नगर योजना बनाई गई है। जयपुर हाईकोर्ट से भी आदेश हो रखे हैं कि बिना जोनल व सेक्टर प्लान के कोई आवासीय योजना नही बनाई जा सकती, लेकिन कोर्ट के आदेशों की अवहेलना करते हुए ऐसा किया गया है।


कौन लोग नियमितकरण का धंधा चला रहे?

जेडीए की ओर से कहा गया कि नियमितीकरण गरीबों की भलाई के लिए किया जा रहा है। इस पर कोर्ट ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि एेसा कौन गरीब है, जिसको एक हजार गज का प्लॉट चाहिए। खण्डपीठ ने कहा कि राज्य में गरीबों का स्टैण्डर्ड ऊंचा हो गया है क्या? इस पर खण्डपीठ ने संपूर्ण परिस्थितियों पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा कि वे लोग कौन हैं, जो नियमितीकरण का धंधा सबसे ऊपर बैठकर चला रहे हैं।

अगली सुनवाई १२ को


जयपुर के लोक संपत्ति संरक्षण समिति के पीएन मैन्दोला ने भी पक्ष रखते हुए कहा कि पृथ्वीराज नगर योजना में करीब बीस हजार करोड़ रुपए का गबन हुआ और सरकार को बड़े स्तर पर राजस्व का नुकसान हुआ है। हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए 12 दिसम्बर को अगली सुनवाई पर सभी सर्कुलर एवं किस-किस अधिकारी ने जारी किए हैं, उसके बारे में कोर्ट में जेडीसी को रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र एमएस सिंघवी, विनीत दवे, अभिनव भण्डारी व जेडीए अधिकारी उपस्थित थे।