
जापान की मेहरबानी होगी तो मिलेगा मारवाड़ को पानी
अविनाश केवलिया.
जोधपुर.
मारवाड़ के तीन जिलों को हिमालय का मीठा पानी पिलाने के लिए जापान की मेहरबानी की जरूरत है। पश्चिमी राजस्थान के लिए वरदान साबित हुई राजीव गांधी लिफ्ट केनाल के तीसरे चरण को घोषणा के बाद भी धरातल पर उतरने का इंतजार है। हालही में सरकार के दो साल पूरे हुए और घोषणाओं व वादों की समीक्षा हुई तो एक बार फिर इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान गया। लेकिन इसमें जापानी कंपनी जायका की सहमति अभी बाकी है।
इसलिए है जापान पर आश्रित
लिफ्ट केनाल का तीसरा चरण 14 सौ करोड़ से अधिक राशि का है। इसके लिए पहले प्रदेश सरकार ने एशियन डवलपमेंट बैंक को पहले लोन के लिए एप्रोच किया। लेकिन एकाएक ब्याज दरें काफी बढ़ा दी गई। इसके बाद जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी (जायका) के पास यह प्रोजेक्ट ले जाया गया है। इसमें 80 प्रतिशत राशि जायका लगाएगा, जबकि 20 प्रतिशत में राज्य सरकार व अन्य एजेंसियों का शेयर है।
पश्चिमी राजस्थान को ऐसे फायदा
- जोधपुर, पाली और बाड़मेर जिलों के 5 शहरों को फायदा
- 2104 कुल गांव इस तीसरे चरण से लाभांवित होंगे
- 14 सौ करोड़ से अधिक की राशि खर्च होगी
- 80 प्रतिशत राशि जायका लेने का प्रस्ताव भेजा गया
प्रदेश सरकार कर रही प्रयास
वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट में प्रदेश सरकार ने घोषणा की थी कि लिफ्ट केनाल के तीसरे चरण को अमलीजामा पहनाया जाएगा। इसके बाद इसकी डीपीआर और प्रस्ताव पहले एडीबी फिर जायका को भेजे गए। अब लगातार पत्राचार कर जायजा से इसके लिए प्लान ऑफ एक्शन लेने का प्रयास किया जा रहा है।
उद्योगों के लिए भी जीवनरेखा
यह प्रोजेक्ट भविष्य में उद्योगों के लिए भी जीवनरेखा साबित हो सकता है। इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा डीएमआइसी में भी उपयोग करने के लिए रखा जा सकता है। दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्र्रीयल कॉरिडोर का एक नोड जो कि अलवर-निमराणा-भिवाड़ी में बना है, उसी प्रकार का जोधपुर-पाली नोड भी प्रस्तावित है। हालांकि पिछले पांच-सात साल में इस पर ज्यादा फोकस नहीं किया गया है, लेकिन फ्यूचर प्रोजेक्ट के तौर पर यह मारवाड़ की तकदीर बदल सकता है।
एक्सपर्ट व्यू
यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार ने पहले केन्द्र और फिर फंडिंग के लिए जायका को भेज रखा है। बीच में कोविड फेज के कारण कुछ मामला अटक गया। जायका ने इसे अपने एक्शन प्लान में भी ले लिया था। लेकिन अब प्रदेश सरकार फिर से प्रयास करे तो अगले वित्तीय वर्ष में इसका एक अंश जारी कर जायका से हिस्सा लिया जा सकता है। यह पश्चिमी राजस्थान के लिए एक बड़ा प्रोजेक्ट है।
- निर्मलसिंह कच्छवाह, सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता, पीएचइडी परियोजना प्रोजेक्ट
Published on:
20 Dec 2020 11:10 pm
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