
IIT Jodhpur की रिसर्च में खुलासा : भारतीयों पर काम कर रही है एड्स की दवा, कोरोना पर भारी इम्यूनिटी
गजेन्द्र सिंह दहिया/जोधपुर. भारतीय लोगों के प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यूनिटी) में कुछ विशेष गुण होने के कारण कोरोना वायरस का संक्रमण कमजोर है। नोवल कोरोना वायरस श्वसन तंत्र के साथ केंद्रीय तंत्रिका तंत्र यानी मस्तिष्क कोशिका न्यूरोन को भी संक्रमित करता है। हाल ही में प्रकाशित बोस्टन रिपोर्ट के अनुसार अमरीका के न्यूयॉर्क सहित अन्य राज्यों में कोरोना से मरने वाले अधिकांश रोगी 30 से 40 वर्ष के थे। इनकी मौत स्ट्रोक से हुई। उनमें कोरोना वायरस के बुखार-खांसी जैसे सामान्य लक्षण नहीं थे, जबकि भारत के अधिकतर गैर लाक्षणिक रोगियों में केवल श्वसन तंत्र का संक्रमण ही सामने आया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर के बायोसाइंस व बायो इंजीनियरिंग विभाग के शोध में यह बात सामने आई।
आइआइटी जोधपुर और बोस्टन रिपोर्ट के अनुसार मस्तिष्क में संक्रमण के दौरान अमरीका के अधिकांश युवा रोगियों में लकवा मार गया था यानी जीभ तुतलाना, बेहोशी और शरीर के एक हिस्से का काम करना बंद होना जैसे असामान्य लक्षण नजर आए। मस्तिष्क के सीटी स्कैन में रक्त के थक्के दिखे। खास बात यह है कि एक थक्के को हटाने पर तुरंत दूसरा थक्का बन रहा था जो कोरोना वायरस के कारण था। भारत में अब तक गले में श्वसन तंत्र की कोशिकाओं में जकडऩे के कारण ही मौत हुई है। मृतकों में अधिकांश बुजुर्ग थे।
स्ट्रेन अलग है यहां
आइआइटी जोधपुर के शोध के अनुसार भारत में कोरोना वायरस का स्ट्रेन अलग है। इससे यहां एड्स के उपचार में काम आने वाली एंट्री रेट्रो वायरल दवाइयों से उपचार में मदद मिल रही है जबकि चीन के वुहान में एचआईवी की दवाएं बेअसर रही थी।
चूरू और फलोदी की गर्मी पर नजर
राजस्थान के चूरू व जोधपुर के फलोदी में गर्मियों में तापमान 49 डिग्री तक जाता है। नमी भी बहुत कम रहती है। हमारा ध्यान अब इस ओर है कि उस समय कोरोना वायरस पर कितना प्रभाव पड़ेगा। साथ ही मानसून के दौर में वायरस की क्रियाविधि पर भी जोर रहेगा।
-प्रो. सुरजीत घोष, बायो साइंस विभाग, आइआइटी, जोधपुर
Published on:
01 May 2020 12:34 pm
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