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आइआइटी जोधपुर बनाएगी लडक़ों की बीमारी डीएमटी की दवाई

IIT Jodhpur - दुनिया में केवल 3-4 मेडिसिन उपलब्ध, वह भी हर महीने करोड़ों रुपए की पड़ती है- एम्स में 200 से अधिक बच्चे रजिस्टर्ड है इस बीमारी के, 3500 में से एक बच्चे में होती है- बीमारी में मांसपेशियों में काम करने वाला डिस्ट्रोफिन प्रोटीन ही नहीं बनता

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आइआइटी जोधपुर बनाएगी लडक़ों की बीमारी डीएमटी की दवाई

आइआइटी जोधपुर बनाएगी लडक़ों की बीमारी डीएमटी की दवाई

जोधपुर. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) जोधपुर के स्थापना दिवस पर २ अगस्त को डूशेन मसक्यलूर डिस्ट्राफी (डीएमटी) अनुसंधान केंद्र का उद्घाटन किया जाएगा। इसमें डीएमटी बीमारी की दवाई पर अनुसंधान होगा। देश में वर्तमान में इस बीमारी की कोई दवाई नहीं है। पूरी दुनिया में केवल 3-4 दवाइयां उपलब्ध हैं। वह भी ट्रायल बेसिस पर। भारत में यह दवाई आयात करनी पड़ती है जो प्रत्येक महीने करोड़ों रुपए में पड़ती है। आइआइटी जोधपुर दवाई की कीमत कम करने का प्रयास करेगा। वर्तमान में इस बीमारी के २०० से अधिक बच्चे एम्स जोधपुर में रजिस्टर्ड हैं। एम्स के अलावा बेंगलुरू स्थित डिस्ट्रॉफी एनिलिएशन रिसर्च ट्रस्ट (डार्ट) इसमें सहयागी है। डार्ट बेंगलुरू एक एनजीओ है। इसके मालिक के बच्चे को यह बीमारी होने के बाद उन्होंने अन्य बच्चों को बचाने के लिए डार्ट की स्थापना की थी।

केवल लडक़ों में होती है डीएमटी
डीएमटी एक आनुवंशिक बीमारी है जो मां के ***** गुणसूत्र एक्स में विकृति के कारण लडक़ों में पैदा होती है। लड़कियां वाहक होती है। हर 3500 में से एक लडक़े में यह बीमारी होती है। इसमें मांसपेशियों के कार्य करने के लिए आवश्यक प्रोटीन डिस्ट्रोफिन नहीं बनता है। मांसपशियों के कार्य करने के लिए पचास से अधिक प्रोटीन होते हैं लेकिन डिस्ट्रोफिन की कमी के कारण बच्चा चलते-चलते गिरने-पडऩे लगता है। वह खुद को संभाल नहीं पाता है। डिस्ट्रोफिन प्रोटीन मस्तिष्क व ह्रदय में भी होता है। एेसे में डीएमटी के 30 प्रतिशत बच्चों में मंदबुद्धि, ऑटिज्म जैसी समस्याएं भी आती है। जब बच्चा 18 से २० साल होता है तब ह्रदय की मांसपेशियों के काम करना बंद करने पर कार्डियक अरेस्ट से उसकी मृत्यु हो जाती है। पूरी दुनिया यह बीमारी अभी लाइलाज है।

डीएमटी के लक्षण
- बच्चे का 2-3 साल विकास ठीक रहता है। उसके बाद उसको सीढ़ी चढऩे-ऊंचाई पर चढऩे में दिक्कत होती है।
- नीचे पालथी मारकर वापस बगैर सहारे के खड़ा नहीं हो सकता।
- इंडियन स्टाइल के टॉयलेट में बैठ नहीं सकता।
- ४-५ साल का होने पर बच्चा चलते-चलते गिरने लगता है क्योंकि मांसेपशियों में शक्ति नहीं रहती है।

एम्स में महीने में एक-दो रोगी
एम्स जोधपुर में डीएमटी के २०० से अधिक रोगी रजिस्टर्ड है। महीने में एक यो दो बच्चा डीएसटी से ग्रसित आता है। फिलहाल बच्चों को स्टीरॉइड्स देकर उनकी बीमारी को कुछ साल के लिए टालने की ही व्यवस्था है।

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‘हम डीएमटी की दवाई पर अनुसंधान करेंगे। यहां डीएमटी पीडि़त बच्चों को फिजियोथैरेपी की सुविधा भी दी जाएगी।’
प्रो सुरजीत घोष, प्रभारी, डीएसटी अनुसंधान केंद्र आइआइटी जोधपुर