
लोकसभा चुनाव में भी शक्ति केन्द्रों के हाथ ही रहेगी ‘शक्ति’
जोधपुर.
भाजपा की ओर से विधानसभा चुनाव में किए गए शक्ति केन्द्रों के प्रयोग को लोकसभा चुनावों में भी जारी रखा जाएगा। संगठन स्तर पर इन केन्द्रों की शक्ति बढ़ाने पर भी विचार हो रहा है।
भाजपा की ओर से पिछली हार की समीक्षा के बाद एक बार फिर बूथ मजबूत करने के दावे किए जा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की टीम का हिस्सा शक्ति केन्द्रों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। बूथ समितियां और पन्ना प्रमुख इनके अधीन काम करेंगे। शक्ति केन्द्रों से आंतरिक फीडबैक भी लिया जाना प्रस्तावित है। ऐसे में माना जा रहा है कि ये केंद्र पार्टी को मजबूत करने के साथ ही प्रत्याशी चयन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विधानसभा चुनाव से पहले तीन-चार बूथ पर एक शक्ति केन्द्र बनाया गया था। अब एक शक्ति केन्द्र पर अध्यक्ष के अलावा 21 जनों की टीम बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। बूथ स्तर पर मॉनिटरिंग व धरातल स्तर पर पार्टी के कामकाज को यही अंजाम दे रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार शक्ति केन्द्रों का कॉन्सेप्ट तो यथावत रहेगा लेकिन इसकी कमान और टीम में बदलाव हो सकता है। ऐसे शक्ति केन्द्र जिसके अधीन आने वाले बूथ का परिणाम सम्मानजनक नहीं रहा या जहां पिछले चुनावों के मुकाबले भाजपा पिछड़ी, उस केन्द्र के संयोजक व अध्यक्षक बदले जा सकते हैं।
अब सम्मेलनों पर जोर
ग्रामीण क्षेत्र और शहरों में पार्टी को मजबूत करने के लिए आगामी माह में बूथ सम्मेलनों के साथ शक्ति केन्द्रों को और अधिक शक्तियां देने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मंडल स्तर तक इस प्रकार के सम्मेलन करने की योजना है।
क्या कहते हैं जिलाध्यक्ष
भाजपा शहर जिलाध्यक्ष देवेन्द्र जोशी बताते हैं कि शक्ति केन्द्रों की व्यवस्था यथावत रहेगी, लेकिन समीक्षा के बाद कुछ शक्ति केन्द्रों की कमान बदलेगी। देहात जिलाध्यक्ष भोपालसिंह बड़ला ने बताया कि शक्ति केन्द्रों को और मजबूत करने के लिए सम्मेलन करने की तैयारी है। फलोदी जिलाध्यक्ष रेंवतसिंह राजपुरोहित ने बताया कि इन केन्द्रों की रणनीति अलग तरीके से बनाई जाएगी।
Published on:
27 Jan 2019 09:21 pm
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