
Indian Army में जज्बे और जुनून का परिचय दे रही जोधपुर की बेटी अंबिका जोधा, महिलाओं को कर रही प्रेरित
जोधपुर. सेना भर्ती की सूचना पर देश के युवाओं ने रैली की तैयारियां शुरू कर दी है। वहीं देश की बेटियां भी इस जज्बे में कहीं पीछे नहीं दिखाई देती। देश की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे जवानों की तरह बेटियां भी सेना की विभिन्न इकाइयों में अपना योगदान दे रही हैं। जोधपुर की बेटी अंबिका जोधा ( Ambika Jodha ) भी हौसले की ऐसी ही एक मिसाल हैं। इंडियन आर्मी ( Indian army ) में मेजर पद संभाल रही अंबिका वायु रक्षा कॉप्र्स का काम देख रही हैं।
बचपन में आईपीएस बनने का सपना रखने वाली अंबिका ने नौंवी कक्षा में भारतीय सेना में जाने का मानस बनाया। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत और जुनून के बूते ही कामयाबी हासिल की। अंबिका बताती हैं कि सैन्य अधिकारियों से वे सदैव प्रेरणा प्राप्त कर तैयारी करती रहीं लेकिन सेना के मापदंड आपसे और अधिक की उम्मीद करते हैं। सीडीएस परीक्षा और एसएसबी के साथ मेडिकल क्लियर करने के बावजूद एक मेरिट से वह चूक गई थीं और ओटीए में शामिल नहीं हो पाईं। निराश होने की जगह खुद को अडिग रखते हुए एनसीसी एसएसबी से द्वितीय मेरिट के साथ अगले बैच में ओटीए ज्वाइन किया। एनसीसी सी सर्टिफिकेट बटालियन अंडर ऑफिसर रैंक प्राप्त और लेडी कैडेट्स में प्रथम रहने वाली अंबिका पहली महिला अफसर हैं जिन्होंने भारतीय सेना में जनरल स्टाफ ऑफिसर ऑपरेशन और कारगिल में स्टाफ ड्यूटी पूरी की है। इसके साथ ही उन्होंने कंपनी कमांडर और एड्ज्यूटांट की ड्यूटी भी निभाई है।
खेलों में रुचि
बीजेएस कॉलोनी निवासी अंबिका ने बताया कि खेलों में उनका लगाव हमेशा रहा है। स्कूली प्रतियोगिताओं सहित बास्केटबॉल, साइकिल पोलो, हॉर्स राइडिंग, जूडो, हैंडबॉल, वॉलीबॉल आदि खेलों में कई मेडल प्राप्त किए हैं। खेलों में उम्दा प्रदर्शन करने के लिए ओटीए सिल्वर मेडल प्राप्त कर चुकी हैं। राष्ट्रीय खेलों में बेस्ट प्लेयर का खिताब भी अपने नाम कर चुकी हैं। गणतंत्र दिवस की परेड में राजस्थान की ओर से बेस्ट कैडेट रह चुकी हैं। साथ ही इस परेड में राजपथ कंटीजेंट और प्रधानमंत्री रैली का नेतृत्व भी कर चुकी हैं।
कम न होने दें जज्बा
अंबिका ने बताया कि सेना में जाने के इरादे को लेकर उनके पिता मधुराज सिंह राठौड़ और माता शुंभागिनी नरूका सहित परिजनों ने हमेशा ही हौसला बढ़ाया। अंबिका कहती हैं कि सपना या इरादा कोई भी हो उसके लिए सकारात्मक विचार के साथ पूरा करने के लिए जज्बा होना जरूरी है। बिना जुनून के लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता है। महिलाओं के सेना में जाने के बारे में उनका कहना है कि पहले उन्हें खुद में विश्वास जगाना होगा। खुद से यह लगातार कहना होगा कि लक्ष्य प्राप्ति ही अंतिम विकल्प है। बिना मेहनत, कठिनाई और अनुशासन के मंजिल प्राप्त नहीं की जा सकती।
Published on:
31 May 2019 02:14 pm
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