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दईजर के प्राचीन मंदिर के ऊपर अंधाधुंध खनन से प्राचीन रहस्यमय गुफाओं के वजूद को खतरा

  पहाडिय़ों पर खनन ब्लास्ट से जगह-जगह दरारें, मंदिर और भोगिशेल परिक्रमा का परंपरागत मार्ग भी हो रहा तबाह

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दईजर के प्राचीन मंदिर के ऊपर अंधाधुंध खनन से प्राचीन रहस्यमय गुफाओं के वजूद को खतरा

दईजर के प्राचीन मंदिर के ऊपर अंधाधुंध खनन से प्राचीन रहस्यमय गुफाओं के वजूद को खतरा

नंदकिशोर सारस्वत

जोधपुर. मंडोर क्षेत्र के प्राचीन दईजर माता मंदिर परिसर में स्थित प्राकृतिक गुफाओं के ठीक ऊपर हो रहे अंधाधुंध खनन से प्राचीन रहस्यमय गुफाओं के वजूद को खतरा पैदा हो गया है। पहाडिय़ों पर खनन के लिए ब्लास्ट से जगह-जगह दरारें आने के बाद भोगिशैल परिक्रमा का परम्परागत मार्ग भी तबाह होता जा रहा है। दईजर की पहाडिय़ों में गुफाओं की भूलभुलैया की दुनियाभर में चर्चा होती है। गुफाओं के ठीक ऊपर पहाड़ी क्षेत्र में चामुंडा माता और व्यास मंडोरा की कुलदेवी दूधेश्वरी माता और ब्रह्माणी माता का मंदिर लाखों मारवाड़वासियों का प्रमुख आस्था का केंद्र भी है।

हनुमान लंगूरों का प्राकृतवास भी हो रहा तबाह
इसी मंदिर की पहाड़ी के चारों तरफ खनन से हजारों की संख्या में रहने वाले हनुमान लंगूरों का प्राकृतवास भी खत्म होता जा रहा है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि खनन ब्लास्ट के कारण कई बार हनुमान लंगूर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं तो कई बंदरों की मौत तक हो चुकी है। जैवविविधता वाले दईजर क्षेत्र की पहाडिय़ों में यदि खनन गतिविधियां निर्बाध जारी रही तो न केवल प्राकृतिक सौन्दर्य बल्कि इॅको टूरिज्म की संभावनाएं हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

भोगिशैल परिक्रमा मार्ग भी हो जाएगा खत्म

प्रत्येक तीसरे वर्ष पुरुषोत्तम मास में भौगिशैल परिक्रमा और नवरात्र आदि अवसरों पर भी माता चामुंडा के साधक आकर पूजा-अर्चना करते हैं। प्राकृतिक वन क्षेत्र में लगातार खनन के कारण वन्यजीवों की संख्या कम होती जा रही है। यही नहीं यहां से बहने वाली प्राकृतिक जलधारा भी सूखने के कगार पर है। सावन मास में प्राकृतिक छटा के लिए प्रसिद्ध दईजर के प्राकृतिक झरनों का आनंद लेने के लिए शहरवासी यहां आते रहे हैं।