
खेती में अपनाया नवाचार : चार माह में ही ले ली 15 लाख की खीरा ककड़ी की पहली उपज
फैक्ट फाइल -
- पॉलीहाउस पर आई लागत - करीब 1 करोड़ रुपए
- बैंक से मिला ऋण - करीब 75 लाख रुपए
- पहली उपज से आय - करीब 15 लाख
- पहली उपज में लगा समय - करीब 4 माह
- पॉलीहाउस का दायरा - करीब 8000 वर्ग मीटर
भोपालगढ़ (जोधपुर) . भोपालगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के ढंढ़ोरा गांव के दो सगे किसान भाइयों ने करीब एक करोड़ रुपए की राशि खर्च कर अपने खेत में करीब 8 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल में अत्याधुनिक पॉलीहाउस का निर्माण करवाया है। चार महिने के अल्प समय में ही इन किसान बंधुओं ने इस पॉलीहाउस में खीरा ककड़ी की खेती कर करीब 15 लाख रुपए से अधिक की आमदनी भी प्राप्त कर ली है।
दो प्रगतिशील किसान भाइयों अजीतसिंह राजपुरोहित व महिपालसिंह राजपुरोहित ने अपने शामलाती खेत में संयुक्त रूप से करीब 8000 वर्ग मीटर इलाके में सरकार की देय कृषि योजनाओं का लाभ उठाते हुए आधुनिक पॉलीहाउस का निर्माण करवाया है। इसमें तारबंदी, जल फार्म पौण्ड, पैकहाउस व ड्रिप सिचांई प्रणाली आदि भी शामिल हैं।
खेती में अपनाया नवाचार
महिपालसिंह राजपुरोहित ने बताया कि परम्परागत खेती से फसलों का वांछित लाभ नहीं मिलने की दशा में उन्होंने उद्यानिकी फसलों की खेती के बारे में विचार किया। जिसके बाद उन्होंने पॉलीहाउस निर्माण डीलर से चर्चा कर खेत की मिट्टी व जल की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुछ ही समय में करीब चार माह पहले अपने खेत के 8 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में पॉलीहाउस का निर्माण करवा लिया।
पॉलीहाउस के साथ ही वर्षा जल संचय के लिए मध्यम आकार का फार्म पौण्ड, खेत की तारबंदी, ड्रिप सिचांई संयत्र व पैक हाउस आदि के निर्माण पर कुल एक करोड़ से अधिक की लागत आई और इसमें से 75 लाख रुपए का बैंक ऋण तथा शेष राशि स्वयं ने खर्च की। पॉलीहाउस बनवाते ही सबसे पहले खीरा ककड़ी की खेती की और इससे चार महिनों में ही करीब 15 लाख से अधिक की आमदनी भी प्राप्त कर ली। किसान अजीतसिंह राजपुरोहित ने बताया कि यह पॉलीहाउस पश्चिमी राजस्थान की जलवायु में बहुउपयोगी है।
पॉलीहाउस में ककड़ी, मिर्च, टमाटर, ब्रोकली, जुगनी इत्यादि कई प्रकार की उन्नत उद्यानिकी फसलों की खेती किसी भी तरह के मौसम में और अनुकूल अथवा प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आसानी से करते हुए अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
क्या कहते हैं अधिकारी
खेती में नवाचार को अपनाना इस क्षेत्र के किसानों की वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार अब जरुरत भी है। इसके लिए शैड-नेड, पॉलीहाउस, बागवानी, सब्जी आदि के साथ-साथ अनार, खजूर व ब्रोकली आदि की खेती एवं इसके लिए बूंद-बूंद सिचांई पद्धति, सामुदायिक जल संरक्षण ढाचां आदि नवाचार के माध्यम से खेती से होने वाली आय में वृद्धि की जा सकती है।
- रफीक अहमद कुरैशी, कृषि पर्यवेक्षक, भोपालगढ़
Published on:
18 Feb 2022 10:52 am
बड़ी खबरें
View Allजोधपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
