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rajasthan high court : गोचर भूमि पर खनन पट्टा नहीं देने के निर्देश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि राजस्थान काश्तकारी (सरकारी) नियम, 1955 में निर्धारित सख्त प्रक्रिया के अभाव में खनन उद्देश्यों के लिए चारागाह भूमि पर नया पट्टा नहीं दिया जाए और न ही नवीनीकरण किया जाए। यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं कि खनन पट्टा धारक आवंटित क्षेत्र से ज्यादा में खनन नहीं करे।

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rajasthan high court

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गोचर भूमि पर खनन पट्टा नहीं देने के निर्देश
राजस्थान काश्तकारी (सरकारी) नियमों की सख्ती से पालना की जाए

जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि राजस्थान काश्तकारी (सरकारी) नियम, 1955 में निर्धारित सख्त प्रक्रिया के अभाव में खनन उद्देश्यों के लिए चारागाह भूमि पर नया पट्टा नहीं दिया जाए और न ही नवीनीकरण किया जाए। यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं कि खनन पट्टा धारक आवंटित क्षेत्र से ज्यादा में खनन नहीं करे।

मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल तथा न्यायाधीश संदीप मेहता की खंडपीठ में याचिकाकर्ता किशनसिंह की ओर से कहा गया कि राजसमंद जिले के ग्राम डूंगर जी का गुडा के खसरा संख्या 2, 35, 94, 122,151 और 336 की चरागाह भूमि पर कथित रूप से अवैध खनन गतिविधि चल रही है। याचिका में एक व्यक्ति अशोक जैन पर गोचर भूमि पर अवैध खनन गतिविधि का मामला उठाया गया। गोचर भूमि के विकल्प में ग्रामीणों को वैकल्पिक अतिरिक्त भूमि आवंटित करने की मांग की गई। कोर्ट ने पाया कि अशोक जैन के पक्ष में वर्ष 1985 से खनन पट्टा है, लेकिन याचिका वर्ष 2021 में दायर की गई। करीब 24.828 हेक्टेयर क्षेत्र के खनन पट्टे को 20 वर्ष की अवधि के लिए नवीनीकृत भी किया जा चुका है।

अभ्यावेदन पेश करने की स्वतंत्रता

याचिका में कहीं भी यह दलील नहीं दी गई कि चारागाह के लिए पर्याप्त भूमि गांव में अन्यथा उपलब्ध नहीं है। कोर्ट ने इसे देखते हुए याचिकाकर्ताओं को एक अभ्यावेदन पेश करने की स्वतंत्रता दी है, जिसमें चारागाह उद्देश्यों के लिए वैकल्पिक भूमि के आवंटन की प्रार्थना होगी। यदि इस उद्देश्य के लिए पहले से पर्याप्त भूमि उपलब्ध भूमि नहीं है।