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CRPF जवान नरेश जाट सुसाइड केस: पत्नी उर्मिला बोली- मैं उनसे राइफल छीनना चाहती थी, पीछे भी भागी, तब तक उन्होंने गोली मार ली

CRPF जवान नरेश जाट मामला : अधिकारियों से परेशान होकर 2 दिन पहले खुद को गोली मारने वाले नरेश जाट की पत्नी उर्मिला का कहना है कि उसके पति इतने भारी दबाव में थे कि उसकी एक भी नहीं सुनी।

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Interview OF CRPF's wife in suicide case

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (आरटीसी) में अपने अधिकारियों से परेशान होकर 2 दिन पहले खुद को गोली मारने वाले नरेश जाट की पत्नी उर्मिला का कहना है कि उसके पति इतने भारी दबाव में थे कि उसकी एक भी नहीं सुनी। वे पूरी रात उनको समझाती रही लेकिन आखिर में उन्होंने अपना जीवन खत्म कर लिया। उनको वर्दी और बंदूक के बगैर जीना नहीं आता था। राजस्थान पत्रिका ने उर्मिला से दो दिन पहले हुए घटनाक्रम पर विशेष बातचीत की।

प्रश्न: नरेश ने आईजी के आने के बाद ही अपने आप को गोली क्यों मारी?
उर्मिला- आईजी के आने-जाने का मुझे पता नहीं है, क्योंकि हमारा पूरा क्वार्टर बंद था। सीआरपीएफ वालों ने लॉक कर दिया था। लाउडस्पीकर से कोई खास सुनाई नहीं दे रहा था। सोमवार सुबह मैं उनके पास में कुर्सी पर बैठकर समझा रही थी। इतने में वह कुर्सी से उठकर रवाना हुए। मैं उनके पीछे गई तब तक उन्होंने खुद को गोली मार ली।

प्रश्न: आपने नरेश से राइफल लेने की कोशिश क्यों नहीं की?
उर्मिला- मैंने बहुत कोशिश की कि वे राइफल मुझे दें। मेरे बार-बार कहने के बावजूद वे राइफल अपने हाथ से नहीं छोड़ रहे थे। मेरी हालत भी ऐसी नहीं थी कि मैं राइफल लेने के लिए कोई और तरीका सोच सकूं।

प्रश्न: आपने उनको समझाया नहीं? फोर्स के अलावा भी जिंदगी है?
उर्मिला- मैंने उनको बहुत समझाया कि गांव चलकर खेती-बाड़ी कर लेंगे। नौकरी छोड़ दो लेकिन वह मुझे कहते रहे कि वर्दी और बंदूक के बगैर उनको जीना नहीं आता। वे कहते रहे मैं जीउंगा वर्दी के साथ और मरुंगा भी वर्दी के साथ।

प्रश्न: नरेश इतने अधिक दबाव में क्यों आ गए थे?
उर्मिला- मेरे पति बहुत ही ईमानदार और सच्चे व्यक्ति थे। उनको नौकरी करते हुए 14 साल हो गए। जोधपुर से पहले वे छत्तीसगढ़ में माओवादियों से टक्कर लेकर यहां पोस्टिंग करवाई थी। उन्हीं मेरे पति को गुंडा कहा गया है। ऐसा किसी जवान को बोला जाता है क्या? जो देश सेवा करता है, उन्हें लगातार हर मामले में झूठा साबित करने का प्रयास किया जा रहा था जो उनके लिए असहनीय था। वे झूठ बर्दाश्त नहीं करते थे।

प्रश्न: उन्होंने राइफल से हवाई फायर क्यों किए?
उत्तर- उन पर राइफल कॉक करने का आरोप लगाया गया। पांच दिन तक परेशान रहे। सीआरपीएफ के अधिकारी भी उनके साथी हैं। कोई आतंकवादी नहीं है जो उन पर राइफल कॉक करेंगे। जब 5 दिन तक परेशान किया और झूठी रिपोर्ट बनाई तो उन्होंने कहा कि अब मैं इनको बताता हूं कि राइफल कॉक करना किसे कहते हैं।

प्रश्न: सीआरपीएफ के जोधपुर सेंटर में क्या वास्तव में जवान दबाव में रहते हैं?
उर्मिला- हां, वहां बहुत अधिक गड़बड़ है। कई जवान दबाव में रहते हैं। दिसंबर में जान देने वाले विकास कुमार भी ईमानदार थे और भारी दबाव में उनको जीवन समाप्त करना पड़ा। मेरे पति भी कहा करते थे कि विकास ने दबाव में जान दे दी।

प्रश्न: अब आप क्या चाहते हैं?
उर्मिला- मैं यह चाहती हूं कि कोई भी अफसर अपने नीचे वाले जवान से मिलने से कतराए नहीं। उन्हें सोच समझकर बोले। मेरे पति तो अब रहे नहीं, मेरी बेटी को नौकरी और मुझे पेंशन मिल जाए। इससे हमारा जीवन यापन हो सकेगा। मैं दुआ करती हूं कि भविष्य में किसी जवान को नरेश बनकर ऐसा कदम नहीं उठाना पड़े।