
जोधपुर . जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय द्वारा संचालित एजुकेशनल मल्टीमीडिया रिसर्च सेंटर (ईएमआरसी) में कार्यरत सभी २२ स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति अवैध है। इनको ईएमआरसी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट (बीओएम) ने बगैर नियमित नियुक्ति प्रक्रिया की पालना किए नियमित कर दिया। वर्ष १९९८ में १५ कर्मचारियों को और २००८ में आठ कर्मचारियों (एक कर्मचारी का नाम दोनों वर्षों में आया) को नियमित कर दिया गया। सभी कर्मचारी बरसों से नियमितीकरण के परिलाभ उठा रहे हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), जेएनवीयू और कन्सोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन के मध्य समझौते के अंतर्गत १९८५ में विवि में ईएमआरसी की स्थापना की गई। उस समय ईएमआरसी की स्थापना एवीआरसी (ऑडियो-वीडियो रिसर्च सेंटर) के रूप में एमबीएम इंजीनियनिरंग कॉलेज के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग में की गई थी। उस समय एवीआरसी एक प्रोजेक्ट था। प्रोजेक्ट के अंतर्गत यूजीसी के लिए शिक्षाप्रद फिल्में बनानी थीं। इसके लिए १९८६ में एक साल के लिए अस्थाई तौर पर निर्माता, कैमरामैन, तकनीकी सहायक व इंजीनियर सहित कई पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाले गए और भर्ती की गई। वर्ष १९९१ में एवीआरसी को विभाग का दर्जा दे दिया गया। चार वर्ष बाद विभाग में भर्ती के लिए नियम निर्धारित हुए। वर्ष १९९८ में अस्थाई तौर पर लगे १५ कर्मचारियों को बैकडोर एंट्री देकर नियमित कर दिया गया।
न विज्ञापन, न परीक्षा, सीधी भर्ती
ईएमआरसी के बीओएम की ९ अप्रेल १९९७ को हुई बैठक में तत्कालीन कुलपति और बीओएम अध्यक्ष ने १५ अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने की सहमति दे दी। इसके बाद ईएमआरसी के तत्कालीन निदेशक ने २६ मार्च १९९८ को कार्यालय आदेश निकालकर १५ कर्मचारियों की सेवाएं नियमित कर दीं। इसी तरह ११ दिसम्बर २००८ को ईएमआरसी के तत्कालीन निदेशक ने विवि के १३ मार्च २००७ के आदेश की पालना में तदर्थ आधार पर कार्यरत आठ कर्मचारियों को नियमित कर दिया। इसमें से दो-तीन को छोड़ दें, तो अधिकतर कर्मचारी सम्बन्धित पद की योग्यता अब भी पूरी नहीं करते हैं।
विवि का उदाहरण देकर परिलाभ दिया
इन २२ कर्मचारियों की सेवाएं पुरानी तारीख से नियमित की गई थीं, लेकिन उन्हें पुरानी तारीख से नियमित परिलाभ नहीं दिए गए थे। सूत्रों के अनुसार वर्ष २०१२ में जब विवि में कई अस्थाई कर्मचारियों को थोक के भाव नियमित किया जा रहा था, तब इन कर्मचारियों को भी विवि ने पुरानी तारीख से नियमितीकरण का लाभ देने का आदेश निकाल दिया।
इन्हें किया है तो हमें भी करो
ईएमआरसी द्वारा वर्ष २००८ में नियमित किए जाने वाले आठ कर्मचारियों में से सात कर्मचारियों ने ६ सितम्बर २००६ को ईएमआरसी निदेशक को पत्र लिखकर नियमित करने की मांग की। कर्मचारियों ने पत्र में विवि की स्थापना शाखा के कार्यालय आदेश-३४६१, २१ जुलाई २००५ का हवाला दिया। इस आदेश में जेएनवीयू ने तदर्थ आधार पर कार्यरत ११ कर्मचारियों को पुरानी तारीखों में नियमित किया था। इसमें आईवी सैमुअल (नर्स, विवि स्वास्थ्य केंद्र), प्रतापसिंह दैया (स्टेनो कम टाइपिस्ट), शशिकांत जोशी (स्टोरकीपर), प्रेमनारायण (कुक, अतिथि गृह), अन्नराज, ओमप्रकाश, जगदीश, बालकिशन, प्रहलाद कुमार, अशोककुमार और रमेश (सभी हैल्पर, भवन निर्माण कक्ष) का नाम शामिल था।
यहां ३२ साल से निदेशक भी नहींईएमआरसी को स्थापना के बाद आज तक अपना डायरेक्टर नहीं मिला है। पिछले ३२ सालों से विवि के प्रोफेसर ही एक-एक साल के लिए कार्यवाहक डायरेक्टर बनते आए हैं। डायरेक्टर की तलाश के लिए विश्वविद्यालय ने कई बार विज्ञापन भी निकाले, लेकिन विवि की ओर से अब तक निकाले गए डायरेक्टर पद के विज्ञापन के लिए योग्यताधारी व्यक्ति नहीं मिला। गौरतलब है कि यूजीसी और विवि अभी तक निदेशक पद की योग्यता भी तय नहीं कर पाए हैं।
मुझे जानकारी नहीं है
मैंने कुछ समय पहले ही ईएमआरसी का पदभार संभाला है। मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है कि स्थाई कर्मचारियों की नियुक्ति कैसे हुई। इस बारे में दस्तावेज खंगालने पड़ेंगे।
प्रो. अखिल रंजन गर्ग, निदेशक, ईएमआरसी, जोधपुर
Published on:
16 Nov 2017 03:20 pm
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