19 अप्रैल 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आजादी से पहले की नहर जो कभी मारवाड़ की प्यास बुझाती थी अब ‘अनाथ’

- पाली जिले के जवाई बांध से जोधपुर के चौपासनी तक आती है नहर- जोधपुर के कुड़ी हौद से लेकर चौपासनी तक नहर के अधिकार क्षेत्र को लेकर जंग- नहर पर सन १९३८ में बने थे सात पम्पिंग स्टेशन अब बचे सिर्फ तीन  

2 min read
Google source verification
jodhpur news,water crisis.water,jawai dam,

- पाली जिले के जवाई बांध से जोधपुर के चौपासनी तक आती है नहर

जोधपुर. रियासतकालीन जवाई नहर जो कभी जोधपुर सहित मारवाड़ के अधिकांश हिस्सों की प्यास बुझाती थी आज खुद अनाथ स्थिति में दिखाई देती है। जवाई बांध से जोधपुर कुड़ी हौद तक तो जिसकी जिम्मेदारी पीएचईडी पाली खण्ड के अधीन है। लेकिन जोधपुर शहर के बीच से गुजरने वाली इस नहर का दिन-ब-दिन गला घोंटा जा रहा है। लेकिन इसको बचाने की बजाय सरकारी विभाग गेंद एक-दूसरे के पाले में डालते नजर आ रहे हैं।
जवाई बांध का निर्माण मारवाड़ की जनता की प्यास बुझाने के लिए रियासत काल में हुआ। जवाई नहर के जरिये जोधपुर तक पानी लाने के लिए नहर १६० किमी लम्बी है। गुरुत्वाकर्षण तकनीक का ही उपयोग होता था। कुड़ी हौद से चौपासनी पानी ले जाने के लिए करीब ३० किमी नहर पर ७ पम्पिंग स्टेशन वर्ष १९३८ में बनाए गए थे। इनमें से चार अब भी मौजूद है जिन पर निर्माण वर्ष स्पष्ट अंकित है। करीब २० साल पहले जब नहर का उपयोग जोधपुर में बंद हुआ तो इस पर कब्जा करने और कई जगह से नहर को पाट कर गला घोंटने के प्रयास शुरू हो गए। राज्य सरकार को नहर की बदहाली भलीभांति ध्यान है। लेकिन इसको बचाने के कोई प्रयास नहीं हो रहे।
एेसे चल रही पत्रबाजी
- वर्ष २०१० से इस नहर के लिए पत्रबाजी हो रही है।
- लोगों की शिकायती पत्र पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग(पीएचईडी) उपखण्ड अधिकारी व तहसीलदार से भूमि स्वामित्व के कागजात मांगता है।
- पीएचईडी करीब ७४ अतिक्रमण भी यहां चिह्नित करता है। कई जगह नहर को समतल कर पाटने के प्रयास भी चिह्नित हुए।
- एक पत्र में नहर के उपयोग में नहीं आ रही दोनों ओर की ५०-५० फीट जमीन नगरीय निकाय, जेडीए को देने की बात सामने आई।
- जेडीए ने एम्स रोड पर नहर के कुछ हिस्से को काम में भी लिया।
- जेडीए भी पूर्ण रूप से नहर अपने पास होने की जिम्मेदारी नहीं उठा रहा।
- तहसीलदार भी यह जमीन किस विभाग के पास यह स्पष्ट नहीं कर पा रहे।
पम्पिंग स्टेशन में से मशीने तक हटी
१९३८ में बने पम्पिंग स्टेशन में से अधिकांश में मशीनें हट चुकी है। भवन खड़े हैं लेकिन कोई सार संभाल करने वाला नहीं। दो पम्पिंग स्टेशन और नहर का कुछ हिस्सा तो जेडीए ने सडक़ विस्तार और नाले बनाने के नाम पर हटा दिए। अब जो बचे हैं उनमें कर्मचारी क्वार्टर व पम्पिंग स्टेशन पर कब्जे होने लगे हैं।