2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Success Story: टैक्सी ड्राइवर पिता और मजदूर मां के बेटे ने किया कमाल, झोपड़ी में पढ़कर अब पहुंचेगा IIT कानपुर

Motivational Story: नागौर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर आदेश विश्नोई ने संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। टैक्सी ड्राइवर पिता और मनरेगा में मजदूरी करने वाली मां के बेटे ने जेईई एडवांस्ड-2026 में शानदार रैंक प्राप्त की है। अब वह IIT कानपुर पहुंचेगा।
2 min read
Google source verification
IITian Adesh Bishnoi

फोटो: पत्रिका

Success Story Of IITian Adesh Bishnoi: राजस्थान के नागौर जिले के छोटे से गांव पाबुथल सथरेण की एक साधारण झोंपड़ी से निकलकर आदेश बिश्नोई ने वह मुकाम हासिल किया है, जिसका सपना लाखों विद्यार्थी देखते हैं। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधनों के बावजूद आदेश ने जेईई एडवांस्ड-2026 में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1783 तथा जनरल ईडब्ल्यूएस वर्ग में 200वीं रैंक हासिल कर आईआईटी कानपुर में प्रवेश का रास्ता बनाया है। उसकी सफलता आज ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पिता निजी स्कूल में टैक्सी ड्राइवर

आदेश के पिता शिशुपाल एक निजी स्कूल में टैक्सी ड्राइवर के रूप में कार्य करते हैं और उसकी मां सुखी देवी मनरेगा में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करती हैं। सीमित आय के बावजूद माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। आदेश ने अपनी शुरुआती शिक्षा जहां उसके पिता वाहन चलाते हैं उसी निजी स्कूल से पूरी की। पढ़ाई में लगातार अच्छे प्रदर्शन के कारण उसे आगे बढ़ने का अवसर मिलता गया।

जोधपुर में रहकर की थी तैयारी

इसके बाद आदेश ने जोधपुर में रहकर जेईई की तैयारी की। उसने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं परीक्षा में 95% और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 94.60% अंक प्राप्त किए। मेहनत और लगन के दम पर उसने जेईई एडवांस्ड-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए आईआईटी कानपुर तक का सफर तय कर लिया।

आदेश का परिवार BPL श्रेणी में आता है और आज भी घास-फूस की झोंपड़ी में रहता है। घर में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। पीने के पानी के लिए परिवार को प्रतिदिन करीब 1 किलोमीटर दूर स्थित सरकारी टांके तक जाना पड़ता है। माता-पिता की रोज की मेहनत से ही घर का खर्च चलता है लेकिन इन कठिन परिस्थितियों ने आदेश के इरादों को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

नीम की छांव बनी क्लासरूम

ग्रामीणों के अनुसार भीषण गर्मी के दिनों में आदेश अक्सर गांव के नीम के पेड़ की छांव में बैठकर घंटों पढ़ाई करता था। संसाधनों की कमी के बावजूद उसने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। आज उसकी सफलता यह साबित करती है कि कठिन परिस्थितियां प्रतिभा और मेहनत के सामने बाधा नहीं बन सकतीं। आदेश बिश्नोई की उपलब्धि न केवल उसके परिवार बल्कि पूरे नागौर जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है। उसकी कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखते हैं।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग