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मां के सपोर्ट से एक हाथ से तैराकी सीखकर जीते गोल्ड मेडल, पढ़े खबर…

महज 6 साल की उम्र में जिया के साथ घटित एक हादसे ने जिंदगी बदल दी। वे पहले दायें हाथ से लिखती थी, लेकिन अब बायें हाथ से लिखने के साथ अपने परिवार और देश का नाम भी रोशन कर रही है।

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मां के सपोर्ट से एक हाथ से तैराकी सीखकर जीते गोल्ड मेडल, पढ़े खबर...

अपने कोच के साथ जिया

जयकुमार भाटी/जोधपुर. कहते है कि अगर पेरेंट्स का सपोर्ट मिले तो कठिन डगर भी आसान हो जाती है। ऐसे में जब महज 6 साल की उम्र में एक हाथ खोने के बाद जीवन में आगे बढ़ना पड़े तो पेरेंट्स के स्पोर्ट की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। ऐसा ही कुछ जोधपुर की 14 वर्षीय जिया गमनानी के साथ हुआ है। जिया ने मां उमा गमनानी के सपोर्ट और अपने बुलंद हौसले से तैराकी में गोल्ड मैडल जीतकर अपना मुकाम बनाया है।

पेरेंट्स के सपोर्ट और आत्मविश्वास से मिली सफलता
15 दिसंबर 2015 को स्कूल बस पलटने से जिया का दायां हाथ कटकर अलग हो गया। दायें हाथ से हर काम करने वाली जिया को बायें हाथ से कार्य करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ऐसे में मां उमा गमनानी ने बेटी की परछाई बनकर हर वक्त उसका हौसला बढ़ाया। वहीं जिया ने भी मां की प्रेरणा से कुछ कर दिखाने की ठानी। उस समय फिजियोथैरेपिस्ट ने कटे हुए कंधे में मूवमेंट रखने के लिए स्वीमिंग की सलाह दी तो उसने 20 दिन में एक हाथ से तैरना सीखा। जिसकी बदौलत जिया ने स्टेट लेवल पैरा स्पोर्ट्स स्वीमिंग में 200, 400 व 800 मीटर रेस में दो सिल्वर व एक ब्रॉन्ज मेडल जितने के बाद वर्ष 2022 में पैरा नेशनल स्पोर्ट्स स्वीमिंग में तीन गोल्ड मेडल जीते। पढ़ाई में अव्वल रहने वाली जिया एडवोकेट बनना चाहती है। जिया ने बताया कि जिंदगी में कभी भी हताश ना होए, खुद का आत्मविश्वास बनाए रखें। कठिनाईयों में जीवन से हार मानने की बजाय जीने का संघर्ष करते रहें, सफलता अवश्य प्राप्त होगी।