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गजेंद्र सिंह दहिया/जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में संचालित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मानव संसाधन विकास (एचआरडी) केंद्र का अजीब मामला सामने आया है। केंद्र के निदेशक डॉ. राजेश दुबे अपने ही कार्यालय में कार्यरत संविदा पर लगे एक कम्प्यूटर ऑपरेटर से कार्यमुक्त हो गए। कार्यमुक्ति का कागज लेकर डॉ. दुबे उदयपुर स्थित मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि गए और वहां प्रोफेसर पद पर जॉइन कर लिया। कुछ समय तक तो जेएनवीयू को इसकी भनक तक नहीं लगी। मामला सामने आने के बाद अब दोनों विश्वविद्यालयों ने एक दूसरे से डॉ. दुबे के कागजात मंगवाए हैं। वर्तमान में डॉ. दुबे की नौकरी दोनों ही विवि के कागजों में बोल रही है।विवि के एचआरडी केंद्र में 2016 में डॉ. दुबे निदेशक बनकर आए। दुबे ने कुछ समय पहले जेएनवीयू से बगैर इजाजत के ही सुखाडिय़ा विवि में बायोटेक्नोलॉजी विभाग में प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया। विवि से आवेदन पत्र बगैर अग्रेषित किए ही उन्होंने उदयपुर जाकर साक्षात्कार दिया और उदयपुर विवि ने भी आंखें मूंद उनको नियुक्ति दे दी। डॉ. दुबे ने विवि की आंख में धूल झोंकने के लिए एचआरडी केंद्र में ही कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर डॉ. श्वेता गहलोत से कार्यमुक्ति के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर करवा लिए। डॉ. गहलोत यहां प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए संविदा पर लगी हुई है। कार्यमुक्ति का यह कागज उदयपुर विवि में दिखाकर वहां प्रोफेसर पद पर जॉइंनिंग दे दी। उनके प्रोफेसर पद की योग्यता को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए। इस मामले में राजभवन ने भी रिपोर्ट मांगी है।
न इस्तीफा दिया, ना मंजूर करवाया
नियमानुसार अन्य संस्थान में किसी व्यक्ति को आवेदन के लिए अपने वर्तमान नियोक्ता से आवेदन पत्र अग्रेषित करवाना पड़ता है। चयन हो जाने पर उसकी जानकारी वर्तमान नियोक्ता को देने के साथ नो ड्यूज प्रमाण पत्र लेना होता है। इसके बाद इस्तीफा देना और मंजूर करवाना होता है। डॉ. दुबे ने इसमें से कोई भी प्रक्रिया पूरी नहंीं की। एचआरडी केंद्र के हाजिरी रजिस्टर में अब भी डॉ. दुबे निदेशक पद पर कार्यरत है और उधर सुखाडिय़ा विवि के बायोटेक्नोलॉजी विभाग के हाजिरी रजिस्टर में भी उनका नाम है।
किसी श्वेता से रीलिव होकर आ गए
डॉ. राजेश दुबे ने हमारे यहां जो कार्यमुक्ति आदेश बताए हैं उस पर एचआरडी सेंटर में कार्यरत किसी श्वेता के हस्ताक्षर है। उन्होंने जेएनवीयू में रहते हुए हमारे यहां जॉइन कर ली। मामले की पूरी जांच की जा रही है।
हिम्मतसिंह भाटी, रजिस्ट्रार, मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि उदयपुर
डॉ. दुबे हमारे ही कार्मिक
एचआरडी केंद्र के निदेशक डॉ. राजेश दुबे ने बगैर विवि की अनुमति के उदयपुर में नौकरी जॉइन कर ली। हमनें उन्हें कार्यमुक्त नहीं किया है। वे अभी भी हमारे कार्मिक है। हमनें उदयपुर विवि को पत्र लिखकर मामले की जानकारी मांगी है।
दशरथ सोलंकी, रजिस्ट्रार, जयनारायण व्यास विवि जोधपुर
मैंने ही रीलिव किया
एचआरडी केंद्र में उनके बाद मैं ही अकेली कार्मिक हूं इसलिए मैंने ही उन्हें रीलिव किया। मुझे तो आठ महीने से वेतन तक नहीं मिला है।
डॉ. श्वेता गहलोत, कम्प्यूटर ऑपरेटर, एचआरडी सेंटर जेएनवीयू जोधपुर
मैंने ई-मेल किया था
मैंने विवि को ई-मेल भेज एक साल की छुट्टी मांगी थी। एक महीना हो गया लेकिन विवि ने मुझे अनुमति नहीं दी। उधर उदयपुर विवि ने मुझे तुरंत जॉइन करने के लिए कहा था इसलिए मैंने वहां जॉइनिंग दी।
डॉ. राजेश दुबे, निदेशक, एचआरडी सेंटर जेएनवीयू जोधपुर
Published on:
02 Aug 2018 08:59 am
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