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बीकानेर सांसद को जेएनवीयू ने बनाया सिंडीकेट सदस्य!

- ऑनलाइन कार्य के लिए सालाना 4.20 करोड़ रुपए देने के बावजूद विवि के वेब पोर्टल में भारी खामियां

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बीकानेर सांसद को जेएनवीयू ने बनाया सिंडीकेट सदस्य!

- कुलपति, रजिस्ट्रार व वित्त नियंत्रक जैसे तीनों प्रमुख पदों की गलत जानकारी

जोधपुर. जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ने वेब पोर्टल पर बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल को सिंडीकेट सदस्य बना रखा है, जबकि मेघवाल का कभी विवि से संबंध नहीं रहा है। खुद मेघवाल को भी इसकी जानकारी नहीं है। विशेष बात यह है कि विवि ऑनलाइन कार्य के लिए कम्पनी को 4.20 करोड़ रुपए का सालाना भुगतान कर रही है। इसके अलावा भी विवि की वेबसाइट में भारी खामियां हैं। राज्य सरकार ने विधायक कोटे से विवि में फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई और बिलाड़ा विधायक अर्जुनलाल गर्ग को सिंडीकेट सदस्य बना रखा है। दोनों को दो साल से अधिक हो गए हैं, लेकिन विवि के वेब पोर्टल पर गर्ग के स्थान पर सांसद मेघवाल का न केवल सिंडीकेट सदस्य के तौर पर नाम लिखा है वरन् उनका फोटो भी चस्पा कर रखा है।

कुलपति आरपी सिंह व रजिस्ट्रार पूनिया

वेब पोर्टल पर एडमिनिस्टे्रशन कॉलम में विवि ने सही जानकारी लिख रखी है, लेकिन गवर्निंग बॉडी कॉलम में गलत जानकारियों की भरमार हैं। इस साल 5 मई को विवि से रुखस्त करने वाले कुलपति डॉ. आरपी सिंह अब भी कुलपति के पद पर काबिज है। एक साल पहले विवि से स्थानांतरित हुए आरएएस अधिकारी करतारसिंह पूनिया अब भी रजिस्ट्रार हैं। छह महीने पहले हाईकोर्ट में स्थानांतरित हुए गजेसिंह कविराज को अब भी विवि ने अपनी वेबसाइट पर वित्त नियंत्रक बना रखा है।

राज्यपाल ने बदले सदस्य, विवि ने नहीं
राज्यपाल व कुलाधिपति कल्याण सिंह ने कुछ महीने पहले जेएनवीयू में अपने नॉमिनी कैलाश भसीन को हटाकर अलवर के राजऋषि भृतहरि मत्स्य विवि के कुलपति डॉ. भारत सिंह को नॉमिनी बनाया था। विवि के वेब पोर्टल पर अब भी कैलाश भसीन ही राज्यपाल नॉमिनी हैं। राज्य सरकार नॉमिनी के तौर पर राजकीय महाविद्यालय अजमेर के डॉ. सुशीलकुमार बिस्सू सिंडीकेट सदस्य बने हुए हैं, जबकि उनके स्थान पर सरकार ने मोहनलाल सुखाडिय़ा विवि के प्रो. मदनसिंह राठौड़ को नियुक्त कर दिया है। कुलपति नॉमिनी के तौर पर डॉ. अनिल गुप्ता व डॉ. प्रभावित चौधरी सिंडीकेट सदस्य है, जबकि डॉ. गुप्ता को अप्रेल में ही हटा दिया गया और डॉ. चौधरी भी इसी महीने सेवानिवृत्त हो गई। इसी तरह सिनेट सदस्यों के मामले में भी कई जानकारियां गलत हैं। एकेडमिक काउंसिल का कॉलम खाली छोड़ रखा है। विवि का ऑनलाइन कार्य करने वाली कम्पनी ने वेबसाइट के एडमिनिस्ट्रेशन कॉलम में जानकारी सही दे रखी है, लेकिन एबाउट कॉलम के गवर्निंग बॉडी में अधिकांश जानकारियां गलत है।

बगैर टैण्डर 4.20 करोड़ का ठेका

विवि ने 13 अप्रेल 2016 को दिल्ली की फर्म आईटीआई लिमिटेड को बगैर टैण्डर विवि में ऑनलाइन कार्य के लिए 12 अप्रेल 2019 तक के लिए 4.20 करोड़ रुपए का ठेका दे रखा है। विवि अब तक इस कम्पनी को करीब 8.50 करोड़ रुपए का भुगतान कर चुका है। इससे पहले यही कार्य विवि का कम्प्यूटर साइंस विभाग सालाना केवल 10 लाख रुपए में कर रहा था। मैं सिंडीकेट सदस्य नहींमुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं जेएनवीयू में कभी सिंडीकेट सदस्य नहीं रहा। विवि ने गलत जानकारी दे रखी होगी।

अर्जुनराम मेघवाल, बीकानेर, सांसद

मैं पता करवाता हूं
यह तो गलत है। मैं पता करवाता हूं, यह कैसे हो गया। बिलाड़ा विधायक गर्ग सिण्डीकेट सदस्य हैं।

प्रो. प्रदीपकुमार शर्मा, कार्यवाहक रजिस्ट्रार, जेएनवीयू जोधपुर