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समाज ने नजरों से उतारा, ये पलकों पर बिठा रहे

-बाल बसेरा संस्थान में नजर आती है बच्चों की अलग ही दुनिया

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Jodhpur : Bal Basera

बासनी/पाल रोड (जोधपुर).
दुनिया ने जिन्हें ठुकराया उन्हें हमने गले से लगाया। ठीक ऐसे ही भाव के साथ जोधपुर के पाल रोड गायत्री नगर स्थित बाल बसेरा संस्थान में निस्वार्थ भाव से बच्चों की सेवा की जाती है। यह वो बच्चे हैं जिनके माता पिता की गंभीर बीमारी की वजह से मौत हो गई। अपने माता पिता की वजह से यह बीमारी इन बच्चों क ो जन्म से ही लग गई। उचित देखरेख व चिकित्सा सुविधाओं के अभाव में गंभीर संक्रमण का प्रभाव इन बच्चों की जान पर खतरा बन आया। ऐसे में इन बालकों के लिए सहारा बना बाल बसेरा संस्थान।

वर्ष 2009 में हुई स्थापना
बाल बसेरा चाइल्ड केयर होम के नाम से वर्ष 2009 में संस्थान की स्थापना की गई। संस्थान के अध्यक्ष दिनेश जोशी बताते हैं कि दर बदर भटकते इन बच्चों को हीन भावना से देखा जाता था। समाज इन बच्चों से दूरी बनाने लगा था। ऐसे में संक्रमित बच्चों के लिए कुछ करने का विचार मन में आया। संस्थान की स्थापना का विचार उन्हें मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य अरविंद माथुर ने दिया। वर्ष 2011 में बालिकाओं के लिए बाल बसेरा सेवा संस्थान की ओर से बचपन बालिका गृह की स्थापना की गई। वर्तमान में इस संस्थान में 38 बालक एवं 25 बालिकाएं हैं। ये दोनों बाल गृह राज्य सरकार से पंजीकृत है। वर्तमान में यह दोनों संस्थान किराए की भूमि पर चल रहे हैं।

नियमित चिकित्सा सुविधाएं--
बाल बसेरा संस्थान में रहने वाले बालकों के लिए संस्थान की ओर से नियमित रुप से इस संक्रमण से संबधित विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में स्वास्थ्य जांच की जाती है। साथ ही संक्रमण के प्रभाव को रोकने के लिए दवाइयां आदि भी नि:शुल्क उपलब्ध करवाई जाती है।

खाने पीने से लेकर मनोरंजन तक की सुविधाएं-
यहां रहने वाले बच्चों को अपने परिवार की कमी महसूस न हो इसके लिए परिवार के सदस्यों की भांति ही इस संस्थान में रहने वाले बच्चों की देखरेख की जाती है। यहां खेलने कू दने से लगाकर मनोरंजन के लिए टेलीविजन इत्यादि की सुविधाएं हैं। साथ ही समय-समय पर विभिन्न प्रकार की मनोरंजक गतिविधियां आयोजित की जाती है। बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी सिखाए जाते हैं।

सफर में आई बाधाओं से नहीं मानी हार
संस्थान की स्थापना के दौरान भी मुश्किल परिस्थतियों से गुजरना पड़ा। संस्थान अध्यक्ष जोशी बताते हैं कि शुरू में कई लोगों ने संस्थान के लिए हंसी उड़ाई। लोगों ने भेदभाव की दृष्टि से देखा। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। हालांकि कई जगहों पर संस्थान के आस-पास रहने वाले कुछ लोगों के विरोध के चलते संस्थान को अन्य जगह पर स्थापित करना पड़ा। संस्थान के सहयोग के लिए निगम व कलक्ट्रेट की ओर से जमीन देने की भी घोषणा की गई है।


प्राप्त किए कई सम्मान
संस्थान को वीर दुर्गादास राठौड़ अवार्ड, केलजरी अने कनाडा अवार्ड, जिला प्रशासन जोधपुर सम्मान, मारवाड़ रत्न,जोधपुर सेवा सम्मान मिल चुके हैं।
कोई न हो भेदभाव का शिकार
यह सत्य है भगवान ने जिसको जन्म दिया उसकी मृत्यु निश्चित है। पर समाज में कोई बच्चा भेदभाव व दवाइयों के अभाव में काल का शिकार न हो इस चुनौती का सामना करने के लिए बाल बसेरा संस्थान का गठन किया गया।
-दिनेश जोशी, अध्यक्ष बाल बसेरा सेवा संस्थान