8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भण्डार ने २३ रुपए में गेहूं बेचे, अफसर को देने पड़े २७ रुपए..

- सहकारिता विभाग: घर का गेहूं ऑफिस लाकर साफ करने का मामला

2 min read
Google source verification
wheat warehouse

wheat warehouse

- सहकारिता विभाग: घर का गेहूं ऑफिस लाकर साफ करने का मामला
जोधपुर . रेलवे स्टेशन स्थित राजीव गांधी सहकारी भवन के अफसर द्वारा घर के गेहूं की पांच बोरियां दफ्तर लाकर सहकारी भण्डार के कार्मिकों से साफ करवाने की खबर प्रकाशित होने के बाद भण्डार ने इसे अपना गेहूं बताया है। इतना ही नहीं, इस गेहंू को पांच किलोग्राम के पैकेट में बेचना भी शुरू कर दिया। भण्डार ने गेहूं की दो क्वालिटी होने से २२ रुपए और २४ रुपए प्रति किलो में गेहूं बेचे, लेकिन अफसर ने भण्डार से २७ रुपए प्रति किलो गेहूं के अनुसार अपना हिसाब कर लिया। ताज्जुब की बात है कि भण्डार के कर्मचारी को अपनी जेब से यह अतिरिक्त भुगतान देना पड़ा। गौरतलब है कि सहकार भवन में बैठने वाले सहकारिता के एक अफसर ने अपने घर का पांच बोरी गेहूं साफ करने के लिए जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के सेंट्रल स्टोर में भेजा था। सेंट्रल स्टोर के कार्मिकों ने गेहंू साफ करने के साथ लोडिंग टैक्सी का भाड़ा भी दिया।

इस संबंध में राजस्थान पत्रिका ने १९ मई को 'घर का गेहंू साफ करवाने ऑफिस भेजाÓ समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद भण्डार ने कृषि मण्डी से फर्जी बिल मंगवा गेहूं को अपना बता दिया। भण्डार के सुपर मार्केट में केवल आटा मिलता है, लेकिन गले पड़े पांच बोरी गेहूं को पांच-पांच किलो के पैकेट में बेचना शुरू किया। भण्डार ने सुपर मार्केट में आने वाले उपभोक्ताओं को सारा गेहूं २२ और २४ रुपए प्रति किलो में बेच दिया। अफसर की ओर से अपना गेहूं महंगी क्वालिटी का बताने के बाद सुपर मार्केट कर्मचारी को २७ रुपए प्रति किलो के हिसाब से भुगतान करना पड़ा।

१०१ रुपए भी भेजे
दस दिन पहले अज्ञात व्यक्ति ने डाक द्वारा उप रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) को १०१ रुपए भेजे। व्यक्ति ने लिखा कि यह रुपए उस अफसर को गेहूं साफ करवाने के खर्च के रूप में दिए जाए। यह भी कहा कि सहकार भवन के पास मुख्यमंत्री गरीब लोगों के लिए बनाई जा रही ८ रुपए की अन्नपूर्णा भोजन थाली भी प्रतिदिन उस अफसर के घर भेज दी जाए। १० किलो आटा लाकर दिया

अफसर की इस हरकत पर एक आरटीआई कार्यकत्र्ता ने भण्डार प्रशासन को १० किलो आटा लाकर भी सौंपा और भण्डार से उसकी पावती भी प्राप्त की। उस व्यक्ति का भी यही कहना था कि यह आटा उस अफसर के घर भेज दिया जाए, ताकि वह गेहंू साफ करने के झंझट से बच जाए।