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उपभोक्ताओं को सुविधा देने के नाम पर खुद चक्रव्यूह में फंसा डिस्कॉम, गले की फांस न बन जाए यह निर्णय

30 साल से नहीं बढ़ाए प्रति कार्यालय मीटर रीडर के पद

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उपभोक्ताओं को सुविधा देने के नाम पर खुद चक्रव्यूह में फंसा डिस्कॉम, गले की फांस न बन जाए यह निर्णय

जयपुर के बाद जोधपुर डिस्कॉम शहरी क्षेत्र में प्रति माह बिल देने की कर रहा तैयारी

पहले चरण में चार शहरों में दिए जाएंगे

जोधपुर. जोधपुर डिस्कॉम जल्द ही शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं के घरों तक हर माह बिल पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। जयपुर के बाद जोधपुर डिस्कॉम में यह पहल होगी। लेकिन हालात यह है कि डिस्कॉम के पास मीटर रीडिंग लेने वाले कर्मचारी ही पर्याप्त नहीं है। अभी दो माह में एक बार रीडिंग ली जाती है। उसमें भी तकनीकी कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ रही है। जब हर माह रीडिंग होगी तो हालात विकट होंगे।
जोधपुर डिस्कॉम के जोधपुर, पाली, बाड़मेर और चूरू जैसे कुछ शहरी क्षेत्रों में आगामी दो-तीन महीनों में प्रतिमाह बिजली का बिल देने की तैयारी की जा रही है। इससे लाखों उपभोक्ताओं को फायदा होगा, लेकिन धरातल पर यह काम लागू करने के लिए वर्तमान में जितना स्टाफ कार्यरत है, उससे दुगुने कर्मचारियों की आवश्यकता होगी। डिस्कॉम के पास फिलहाल इन पदों के लिए कोई स्वीकृति ही नहीं है। ऐसे में तकनीकी कर्मचरियों पर ही भार बढऩा लाजिमी है। एक एईएन कार्यालय के अधीन न्यूनतम 5 मीटर रीडर की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में एक कार्यालय में औसतन एक रीडर ही कार्यरत है।

मीटर रीडिंग की गणित

2 माह में एक बार होती है अभी घरों में बिजली मीटर रीडिंग।
1 महीने में घरों से रीडिंग लेकर बिल जारी करने की तैयारी।

- 10 जिले हैं जोधपुर डिस्कॉम के अधीन।
- 500 के करीब पद स्वीकृत हैं पूरे जोधपुर डिस्कॉम में मीटर रीडर के।

- 300 से अधिक पद इनमें से रिक्त हैं।
- 30 साल से नई भर्ती नहीं हुई डिस्कॉम में मीटर रीडर की।


20 हजार उपभोक्ताओं पर एक मीटर रीडर

जोधपुर डिस्कॉम में 38 लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। इनके घरों से मीटर रीडिंग लाने की जिम्मेदारी करीब 200 कार्यरत मीटर रीडरों के पास ही है। इस लिहाज से करीब 20 हजार मकानों से एक मीटर रीडर रीडिंग लेता है, लेकिन यह धरातल पर संभव नहीं। इसीलिए तकनीकी कर्मचारियों को अपने मूल काम से हटा कर मीटर रीडिंग में लगाया गया है।

एक एईएन कार्यालय में दो पद ही स्वीकृत
जोधपुर डिस्कॉम में मीटर रीडर के स्वीकृत पदों की संख्या प्रति एईएन कार्यालय 2 की है। यह 30 साल पहले निर्धारित हुई थी। तब एक एईएन कार्यालय के पास पांच से सात हजार बिजली उपभोक्ता थे, लेकिन अब एक कार्यालय के अधीन करीब 25 हजार उपभोक्ता हैं, मगर पदों की संख्या वही है। खास बात यह है कि जो पद स्वीकृत हैं, उनमें भी दो तिहाई रिक्त हैं।


इनका कहना है...

मीटर रीडर की भर्ती कई सालों से नहीं की गई है। वर्तमान में तकनीकी कर्मचारियों के भरोसे रीडिंग की गाड़ी चल रही है। हर माह बिल आए, यह अच्छी बात है,मगर इसके लिए सरकार को कर्मचारियों की भर्ती कर पूरी व्यवस्था करनी चाहिए।
- मंडलदत्त जोशी कार्यकारी अध्यक्ष, प्रांतीय विद्युत मंडल मजदूर फैडरेशन

बिल देने की तैयारी

जयपुर डिस्कॉम के बाद जोधपुर डिस्कॉम के कुछ सर्किल में हम प्रति माह बिल देने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए कर्मचारियों की कमी रहने की बात सही है। हम सभी कमियां दूर कर बेहतर सेवाएं देने का प्रयास कर रहे हैं।
- एसएस यादव, प्रबंध निदेशक, जोधपुर डिस्कॉम