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जोधपुर में चतुर्भुज के नाम से प्रसिद्ध है रसीला गुलाब जामुन

जोधपुरी जायका जोधपुर की पहचान बना गुलाब जामुन

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famous rasgulla in india

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जोधपुर. जोधपुर शहर अपनी मीठी बोली, आकर्षक वेशभूषा और खानपान के लिए मशहूर है। इस शहर में अलग रैसिपी के साथ बनाए गए व्यंजन लजीज हैं, जो शख्स एक बार जोधपुरी व्यंजन खा लेता है वह फिर यहां का दीवाना हो जाता है। जिस तरह जोधपुर का तीखा मिर्ची बड़ा और मीठी मावे की कचौरी मशहूर है। उसी तरह यहां का लजीज गुलाब जामुन भी चर्चित है। आम तौर पर जो लोग दूसरी मिठाई नहीं खाते, वे भी गुलाब जामुन जरूर खाते हैं। यह सभी की पसंदीदा मिठाई है। गुलाब जामुन दो तरह से बनते हैं। मावे से और पनीर से।

मावे के गुलाब जामुन सुनहरी और पनीर के गुलाब जामुन काले होते हैं। अधिकतर लोग सुनहरी गुलाब जामुन ही पसंद करते हैं। गृह विज्ञान और पाक कला विशेषज्ञों के अनुसार जोधपुर में यों तो मिठाई की हर छोटी बड़ी दुकान पर गुलाब जामुन बनते और बिकते हैं, लेकिन पुंगलपाड़ा के गुलाब जामुन की बात ही कुछ और है। यहां की मशहूर मिठाई की दुकान पर बनने वाले गुलाब जामुन का जायका दूसरे गुलाब जामुन से जुदा और शानदार माना जाता है।

जोधपुर के पुंगलपाड़ा में सौ साल से ज्यादा पुरानी दुकान है। इसे चतुर्भुज अग्रवाल ने स्थापित किया और उनका नाम इस गुलाब जामुन के साथ जुड़ गया। हालांकि बाद में पीढ़ी दर पीढ़ी रामबक्ष और उसके बाद ज्योति स्वरूप और फिर रमेशचंद्र अग्रवाल ने जायके की इस पंरपरा को आगे बढ़ाया , लेकिन लोग आज भी गुलाब जामुन को चतुर्भुज के नाम से ही जानते हैं।