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जोधपुर स्थापना दिवस : दुनिया के दस प्रमुख पयर्टन स्थलों में शुमार है ब्लू सिटी

जोधपुर आज अपना 562वां स्थापना दिवस मना रहा है। राव जोधा के बसाए इस शहर ने बसने से लेकर अब तक मेट्रो सिटी तक का सफर किया है, लेकिन यहां के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल, यहां की अपणायत और यहां का खानपान सात समंदर पार से आने वाले सैलानियों को भी अपनी ओर ऐसा आकर्षित करते हैं कि जो एक बार यहां आया, जीवन पर्यन्त उसकी स्मृतियों में जोधपुर छाया रहता है।

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jodhpur foundation day : blue city is famous for its tourism

जोधपुर स्थापना दिवस : दुनिया के दस प्रमुख पयर्टन स्थलों में शुमार है ब्लू सिटी

जोधपुर आज अपना 562वां स्थापना दिवस मना रहा है। राव जोधा के बसाए इस शहर ने बसने से लेकर अब तक मेट्रो सिटी तक का सफर किया है, लेकिन यहां के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल, यहां की अपणायत और यहां का खानपान सात समंदर पार से आने वाले सैलानियों को भी अपनी ओर ऐसा आकर्षित करते हैं कि जो एक बार यहां आया, जीवन पर्यन्त उसकी स्मृतियों में जोधपुर छाया रहता है।

सूर्य की सर्वाधिक समय तक शहर में मौजूदगी ने इसे सूर्यनगरी के नाम से मशहूर किया है तो कई कवियों-शाइरों की रचनाओं में शहर-ए-आफताब के नाम से मशहूर इस शहर की दुनिया में ऐसी धाक जमी है कि पिछले साल कई पर्यटन वेबसाइट्स के सर्वे में यह ऐतिहासिक शहर दुनिया के दस प्रमुख पर्यटन स्थलों की सूची में शामिल हो गया। आज भी हिन्दुस्तान आने वाला हर तीसरा-चौथा सैलानी जोधपुर जरूर आता है और मंत्रमुग्ध हो जाता है मेहरानगढ़ से लेकर जसवंत थड़ा और उम्मेद पैलेस का स्थापत्य देखकर।

जोधपुर के ये पर्यटन स्थल शहर के शाही इतिहास और संस्कृति में डूबे हैं। नीले रंग में रंगे मकानों से घिरा शहर का परकोटा हर किसी का मनमोह लेता है और यही कारण है कि इसे ब्ल्यू सिटी के रूप में भी पहचाना जाने लगा है। मध्यकालीन इमारतें और इनके बीच से निकलती घुमावदार गलियां जोधपुर के मस्तक पर सुशोभित मेहरानगढ़ के तल पर बसी हैं। जादुई और ऐतिहासिक रुप से समृद्ध शहर की खूबसूरती में राव जोधा डेज़र्ट रॉक पार्क और जगमगाती ऐतिहासिक इमारतें चार चांद लगा देती हैं। भव्य महलों से लेकर मध्यकालीन मेहरानगढ़ तक, जोधपुर के शाही अतीत के बारे में जानने के इच्छुक लोगों को अपनी ओर खींच लाती है। आईए आपको सैर करवाते हैं सूर्यनगरी के प्रमुख पर्यटक स्थलों की.....

मेहरानगढ़
विशाल परिसर, दीवारों पर महीन नक्काशी, लाल पत्थर के बने शाही हॉल और अंदर राजसी सजावट मेहरानगढ को देश का सबसे बेहतरीन किला बनाती है। यह किले की वास्तुकला शाही राजपूत संस्कृति की याद ताजा कराती है। किला चारो ओर बड़ी बड़ी दीवारों से घिरा है जो एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है यहां से पूरा शहर दिखाई देता है। किले का संग्रहालय शहर के शानदार अतीत की कहानी बताती है। इसमें शाही पालकी, तलवारें, चित्र और पुराने संगीत वाद्ययंत्र प्रदर्शित हैं। किले के जिस हिस्से में तोप रखी है वह किले का सबसे ऊंचा स्थान है यहां से सूर्यास्त के शानदार नजारे के साथ जोधपुर शहर के नीले मकानों का दृश्य भी दिखाई देता है। राव जोधा ने मेहरानगढ़ की नींव 12 मई 1459 को चिडिय़ाटूंक की पहाड़ी पर रखी थी। जमीन से लगभग 150 मीटर ऊंचाई पर बना किला दिल्ली की कुतुबमिनार से भी ऊंचा है।

जसवंत थाड़ा
पूरी तरह से सफेद दूधिया पत्थर से बने जसवंत थाड़ा को राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है। नक्काशीदार बुर्ज और सुंदर गुंबद दिनभर सूरज की रोशनी में चमचमाते रहते हैं। भीड़ भरे जोधपुर शहर की गलियों से दूर यह एकांत स्थान सैलानियों को खूब लुभाता है। मेहरानगढ़ के बाई ओर बनी इस इमारत का निर्माण महाराज जसवंत सिंह द्वितीय की याद में किया गया था। राजपूत वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण इस शाही समाधि में राठौर वंश से जुड़े प्रभावशाली चित्रों और शानदार कलाकृतियों का संग्रह भी है।

राव जोधा डेजर्ट रॉक पार्क
मेहरानगढ़ किले के पास स्थित राव जोधा डेज़र्ट पार्क ज्यादा पुराना नहीं है। पार्क पर्यटकों के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। पार्क में पर्यटक कई तरह के अन्य पेड़-पौधे देख सकते हैं। पर्यावरण प्रेमी प्रसन्नपुरी गोस्वामी आज भी इस पहाड़ी भूमि को हराभरा करने में लगे हैं।

उम्मेद भवन पैलेस
जोधपुर शहर में ऊंचाई पर स्थित उम्मेदभवन पैलेस कला का एक अदभुत उदाहरण है। यह अभी भी शाही परिवार का निवास स्थान है होने के साथ होटल भी है। इसका निर्माण सन 1928 से सन 1943 के बीच जोधपुर के राजा उम्मेद सिंह ने करवाया था। उस समय इलाके में भयंकर सूखा पड़ा था। आम लोगों को रोजगार देने के लिए इस महल का निर्माण करवाया गया था। इसके आसपास 26 एकड़ का खूबसूरत बगीचा भी है। इसे बनाने में पूर्वी और पश्चिमी परंपराओं को मिश्रित किया गया है। महल को बनाने में राजपूतों से लेकर पुनर्जागरण काल की वास्तुकला को साथ लाया गया है। आज, इस सुनहरे पत्थरों से बने महल में 64 लग्जऱी कमरे और सुइट के साथ एक संग्रहालय भी है।

मंडोर गार्डन
मंडोर गार्डन एक धरोहर स्थल है जो ऐतिहासिक होने के साथ शहर की प्राकृतिक खूबसूरती को भी बढ़ाता है। जोधपुर से पहले मंडोर, मारवाड़ की राजधानी थी। मंडोर गार्डन जोधपुर से उत्तर दिशा में 9 किलोमीटर दूर है। यहां एक सरकारी संग्रहालय और मंदिर है। पत्थर की बनी छत के कारण वास्तुकला का यह अदभुत नमूना लोगों को आकर्षित करता है इसके साथ ही जोधपुर के शासकों की गहरे लाल रंग की छतरियां और शानदार ग्रीन गार्डन भी है जिसमें पेड़ो-पौधों की अनगिनत प्रजातियां हैं। लाल पत्थर से बनी इस संरचना की सबसे अनोखी चीज महाराज अजीत सिंह की छतरी है जो देखने में काफी खूबसूरत है।

कायलाना झील
कायलाना झील इस ऐतिहासिक शहर की खूबसूरती को और बढ़ा देती है। यह झील शहर के केन्द्र से 10 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। इस झील का निर्माण सन 1872 में प्रताप सिंह ने करवाया था। कृत्रिम झील और इसके आसपास का इलाका पक्षी प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है इसलिए राजस्थान की झीलों में सबसे ज्यादा पर्यटक इसी झील को देखने आते हैं।

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