
बासनी (जोधपुर). केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में बागवानी ब्लॉक में इन दिनों हर किसी की जुबां पर गोळा किस्म का बेर चढा हुआ है। इसकी मिश्री जैसी मिठास और सेव जैसा आकार होने से इसकी मांग पिछले कई सालों से बढती जा रही है। हालांकि बीते अक्टूबर और नवंबर माह में तापमान ज्यादा रहने से केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी) में इस बार बेर का उत्पादन पिछले साल की तुलना में थोड़ा कम रहेगा। जिससे काजरी को करीब 1 लाख रुपए की रेवेन्यू कम रहेगी।
काजरी के उद्यानिकी ब्लॉक में 22 किस्मों के बेर का उत्पादन होता है। इसके अलावा काजरी के वैज्ञानिक अच्छी किस्म के बेर के लिए दूसरे ब्लॉक में कई 18 किस्मों के बेर पर प्रयोग चल रहे हैं। अक्टूबर और नवंबर माह में बेर में फ्रूट सेट होता है। इस दौरान तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने से नमी कम हो गई। ये तापमान बेर की फ्रूटिंग के अनुकूल नहीं होता है। इस वजह से उत्पादन कम रहने से इस बार बेर का टेंडर भी पिछले साल की रेट से एक लाख रुपए कम में मिला है। पिछले साल बेर का टेंडर 7 लाख 20 हजार रुपए में उठा था लेकिन इस बार 6 लाख 22 हजार में ही उठा। अभी काजरी में गोला, इलायची, रश्मि, अलीगंज और टिकड़ी किस्म के बेर हर किसी की जुबां पर चढे हुए हैं। बेर के भाव 30 से 100 रुपए किलो तक है।
अगले साल से मिलेगा थाइलैंड एप्पल
वहीं काजरी में विदेशी किस्म के बैर थाइलैंड एप्पल के 100 प्लांट लगे हुए हैं। किसानों में इसके पौधों की मांग अभी से ही बढ गई है। इसके लिए अलग से ब्लॉक में पौधे विकसित किए जा रहे हैं। ये किस्म दो पौधों के बडवुड लेकर उन्हें ग्राफ्टेड कर तैयार किए गए हैं। इस बेर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा काफी होती है। वर्तमान में किसान इसके पौधे बाहर से मंगवाते हैं काजरी में उन्हें अगली सीजन से ये पौधे मिल जाएंगे।
फैक्ट फाइल
-1500 पौधे उद्यानिकी ब्लॉक में लगे हैं।
- 22 किस्मों के बेर का उत्पादन होता है।
- 18 किस्मों पर प्रायोगिक कार्य चल रहा है।
नमी कम रही
15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच बेर की फ्रूट सेटिंग होती है। इस दौरान तापमान 40 के आसपास रहने से नमी कम हो गई। जिससे इनके उत्पादन पर विपरीत असर पड़ा। बेर के लिए 35 डिग्री तापमान सही रहता है। -पीआर मेघवाल, प्रधान वैज्ञानिक, काजरी।
Published on:
09 Jan 2018 05:42 pm
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