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अंतरराष्ट्रीय बाजार में चमक बिखेरेगा जोधपुर की बेटियों का ‘हुनर’

क्राफ्ट की दुनियां में छा जाने को तैयार हस्तशिल्प उत्पाद

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Jodhpur's Daughters' Hands-on Skills Will Shine In The International

Jodhpur's Daughters' Hands-on Skills Will Shine In The International

अरविन्दसिंह राजपुरोहित
बासनी (जोधपुर).
एक वो जमाना था जब महिलाओं, बेटियों को घर के कामकाज तक ही सीमित रखा जाता था, तब महिलाओं को स्वरोजगार की उम्मीद करना भी बेमानी माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। बदलते परिवेश में महिलाएं भी पुरुषों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है। महिलाओं में आत्मनिर्भर बनने का जज्बा किस कदर है कि कुड़ी क्षेत्र में वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार के तत्वावधान में हस्तशिल्प निर्यात एवं संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) की ओर से आयोजित हस्तशिल्प प्रशिक्षण शिविर में देख सकते हैं। परिषद की ओर से आयोजित 40 दिवसीय स्किल डवलपमेंट प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को नि:शुल्क प्रशिक्षण के माध्यम से हस्तशिल्प प्रॉडक्ट बनाना सिखाया जा रहा है। यहां से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रशिक्षणार्थी देश ही नहीं विदेशों तक हस्तशिल्प प्रॉडक्ट को बेच सकते हैं।

राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के उत्पाद
शिविर के माध्यम से प्रशिक्षक महिलाओं को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिकने वाले उत्पादों को बनाना सीखा रहे हैं। इसके माध्यम से कपड़े पर हाथों से विभिन्न प्रकार की आकर्षक कशीदाकारी कैसें करें, इसके बारे में सिखाया जा रहा है। इसके तहत प्रशिक्षणार्थी कुशन कवर, चद्दर सहित विभिन्न प्रकार के डिजाइनर व क्वालिटी उत्पाद बनाने की दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है। वर्तमान में हस्तकला क्षेत्रों में कॅरियर की असीम उम्मीदें है। क्योंकि भारत के बाहर अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, यूरोप, अफ्रीका सहित विभिन्न देशों में हस्तशिल्प उत्पादों की भारी मांग है।

परिषद की ओर से सहयोग
हस्तशिल्प निर्यात एवं संवर्धन परिषद की ओर से ऐसे कलाकारों को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर विभिन्न प्रकार के फेयर आयोजित किए जाते हैं। जिनमें नए कलाकारों को अपने बनाए उत्पादों को बेचने के लिए बड़ा मंच मिलता है। जिसके माध्यम से देशी-विदेशी ग्राहकों तक अपने उत्पाद बेच सकते हैं। इन महिलाओं को भी परिषद की ओर से उत्पादों को बेचने व व्यवसाय स्थापित करने के लिए सहयोग किया जाएगा।

शिविर समापन पर मिलेगा मानदेय
ईपीसीएच के अधिकारी गोपाल शर्मा ने बताया कि प्रशिक्षण में वर्तमान में 40 महिलाएं भाग ले रही है। जोधपुर में कुड़ी के अलावा मदेरणा कॉलोनी, नई सड़क में भी ऐसे ही स्किल डवलपमेंट प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। सभी प्रशिक्षणार्थियों को शिविर समापन के पश्चात मानदेय व सिलाई मशीन दी जाएगी।

बॉयोमैट्रिक हाजिरी
शिविर में प्रशिणार्थियों के लिए अनुशासन के लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। सुबह 12 से शाम 6 बजे तक चलने वाले शिविर में सभी को उपस्थित होना अनिवार्य है। इसके लिए सभी की बॉयोमैट्रिक हाजिरी भी ली जाती है। प्रशिक्षण शिविर के समापन के बाद मिलने वाले लाभ के लिए 80 प्रतिशत उपस्थिति होना जरुरी है।

इनका कहना है-
मुझे प्रशिक्षण शिविर में विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प उत्पाद बनाना सीख रही हुं। जिनमें कपड़े पर वर्क, कशीदाकारी आदि प्रमुख है। यहां से सीखकर अपना व्यवसाय शुरु कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं।
-लक्षिता वर्मा

यहां आकर कई तरह के हस्तशिल्प उत्पादों को बनाने के बारे में जानकारी प्राप्त करने का मौका मिला। ऐसे शिविर समय-समय पर आयोजित किए जाने चाहिए। जिससे अधिक से अधिक संख्या में महिलाओं को सीखने का मौका मिले।
-सोनू सोलंकी

प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए कुड़ी से ही आ रही हूं। शिविर के माध्यम से मुझे हस्तकला को करीब से जानने का मौका मिला। यहां का माहौल महिलाओं के लिए अनूकूल है।
-सपना देवपाल

कपड़े पर कशीदा बनाना सीख रही हूं। शिविर में प्रशिक्षकों की ओर से बेहद सरल व सहज ढंग से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिलाओं के लिए घर बैठे ही रोजगार ? के मौके इस शिविर के माध्यम से मिल रहे हैं।
-संतोष

सभी प्रशिक्षणार्थियों को निर्धारित समय-सीमा के अंदर कुशन, तकिया कवर आदि पर कशीदाकारी करना सिखाई जा रही है। वर्तमान में इस तरह के उत्पादों को विदेशों में खूब पसंद किया जा रहा है।
-रेनू वशिष्ठ, प्रशिक्षक

इन्होंने कहा-
प्रशिक्षण शिविर के माध्यम से महिलाओं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों की ओर से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कुशल मैनपॉवर की मांग व उपलब्धता के बीच के अंतर को भरना है। साथ ही हस्तशिल्पियों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करना है।
-राकेश कुमार, कार्यकारी निदेशक, हस्तशिल्प निर्यात एवं संवर्धन परिषद